स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(स्वरोदय विज्ञान)
चन्द्र-कर्म
वस्त्र पहिरे, मित्रता कीजै, घोरे की थान नये घर कौ प्रवेश, गढ़ व्योपार, बीजु ववै, दूरयात्रा सुभ, मंगल कारज कीजै।
सूरज - कर्म
उतावली कामु, मोहिनी असनानु, भोजन, मैथुन, घोरे की असुवारी, नाउ चढै, नदी पहिरे, परवतु रुख चढै। जलुवायै फोरो। सोवै, भोजन करै। युद्ध कौ जाइ, दाहिनै सुर जातै गढ़पती होइ। मोरचा मारवे की बायें सुर जीतै।
पक्ष-विचार
सुकल पक्ष है चन्द्र कौ। कृष्ण पक्ष है सूरज कौ। जौ सूरज बहे कृष्ण पक्ष, दोइज, तीज लौ; तो सुफलदायक है। अरु चन्द्र बहे तो अशुभ। चिन्ता द्रव्यहानि।
अरु जो चंद्र पक्ष तीन दिन सूरज बहे तो चिन्ना, मित्र हानि होई। रवि, मंगल, गुरु, शनिवासरे सूरज नाडी पूर्व-उत्तर दिसा फलदायक है, कृष्ण पक्ष में विशेष कैं सोम, शुक्र, बुध वासर दक्षिण-पश्चिम दिशा फलदायक है।
संक्रान्त को भेदु
मेघ, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ ये छे संक्रातैं सूरज की हैं। इनमें सूरज बहे तो शुभ। इन संक्रयांत विषै चन्द्र वहे तो असुभ। हानि चिता। वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन ये छे संक्रान्त दियै चन्द्र बहे तो सुभ है। सूरज बहे तो अशुभ है। अरु कर्क-मकर की संक्रान्तन विषै सूरज बहे तो महिना छैह की आरबल जानिजै।
रवि के दिन सूरज न बहे तो आयु को कलेसु होइ। सोमवार के उदै सूरज बहे तो चिता बढै। मंगल के उदै चन्द्रमा धन हानि करै। बुद्ध के उदै सूरज बहे तो गमन करावै अवस कैं। बृहस्पति को चन्द्र उदै विग्रह दिखावै, राज में कैं गढ़ में। शुक्रवार को सूरज बहे तो छैह महिना में राजा को कालु होइ। शनिचर को चन्द्र उदै; देश ऊजर करै। एक-एक पल बहे तो इने अपगुन जानिजै। जो संध्या सूरज के दिन चन्द्र, चन्द्र के दिन सूरज बहे आठ दिन लौ;