भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

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अथ अनाहद-विधि

श्रीशिव उवाच

तब शिव संकर बोले वानी, चित दैकरि तुम सुनौ भवानी । जो नर सुनें अनाहद चाहे, सौ तो सदा एकन्त निवाहे । बैठक ताहि दुजानू जानौ, दुहु चूतर तरवा पर आनौ । दोउ हाथ काननि पर कीजैं, तर्जनी तिनि के पीछे दीजे । सब्द अनाहद जागै जहा, निसि दिन मंगल ध्यान में तहां । बैठो बुधि विज्ञान सु पावै, जो अनहद सो ध्यान लगावै । महिमा ताकी कही न जाई, बहु बिस्तार न किन हू पाई । ऐसी विधि संकर कर ज्ञानी, रीति अनाहद सुखद बखानी ।

इति अनाहद-विधि

पार्वत्युवाच

बहुरि गौरि बोली सिव पाहीं, जोनी सब्द कर्म जग माहीं । करिकें कृपा सु मोसों कहियै, ताकैं कियै सिधि कहा लहियै ।

अथ शब्द-कर्म

श्रीशिव उवाच

बोले सिव गुरुजन यह भाखै साध पालथी आसन राखै । कटि अरु पीठि समासम करै, दोऊ कर तहांई लै धरै । कुहनी दोउ नाभि पर कहै, तरवा पर दोउ अंगूठा रहे । ब्रह्मरन्ध्र कौं धरै जुध्याना, साधै विरला संत सुजाना । अमर होइ सो जोगी जानौ, तिहुँ काल तिहि आगै मानों ।

इति शब्द-कर्म