स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनवम्बर 1967 को जन्मे और 30 नवंबर 2010 को ही संसार छोड़ने वाले ज्ञान के महासागर श्री राजीव दीक्षित जी आज केवल आवाज के रूप में हम सबके बीच जिंदा है उनके जाने के बाद भी उनकी आवाज आज देश के लाखों करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रही है और भारत को भारत की मान्यताओं के आधार पर खड़ा करने आखिरी उम्मीद बनी हुई है।
राजीव भाई को शत शत नमन ॥
पूरे Internet पर राजीव भाई के केवल 55 से 60 व्याख्यान ही उपलब्ध थे लेकिन उनके कुछ समर्थकों ने उनकी मृत्यु के बाद से दो ढाई साल की मेहनत कर जहां जहां राजीव भाई घूमे थे वहाँ अलग अलग लोगों से संपर्क कुल 150 व्याख्यान जुटा लिए हैं । जो नीचे दी गई website पर उपलब्ध है ॥
भारत की आजादी का असली इतिहास
आज से लगभग 400 साल पहले, वास्कोडीगामा आया था हिंदुस्तान, इतिहास की चोपड़ी में, इतिहास की किताब में हमसब ने पढ़ा होगा कि सन् 1498 में मई की 20 तारीख को वास्कोडीगामा हिंदुस्तान आया था।
इतिहास की चोपड़ी में हमको ये बताया गया कि वास्कोडीगामा ने हिंदुस्तान की खोज की, पर ऐसा लगता है कि जैसे वास्कोडीगामा ने जब हिंदुस्तान की खोज की, तो शायद उसके पहले हिंदुस्तान था ही नहीं। हजारों साल का ये देश है, जो वास्कोडीगामा के बाप दादाओं के पहले से मौजूद है इस दुनिया में, तो इतिहास कि चोपड़ी में ऐसा क्यों कहा जाता है कि वास्कोडीगामा ने हिंदुस्तान की खोज की,
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