स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
DevanagariHindipublished77 पृष्ठ
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- ➤ हमारी पाचन संस्था में दो चक्कियाँ हैं जो भोजन को पीसकर इतना महीन बना देती है कि जिससे भोजन का प्रत्येक कण पाचक रस से संपूर्ण लिप्त होकर पूरी तरह से पच जाये। हली चक्की दाँत हैं जो भोजन को 80% तक पीसते हैं व दूसरी चक्की पेट का ऊपरी भाग हैं जिसे फंडस कहते हैं जो भोजन को केवल 20% ही पीस सकता है। यदि भोजन दाँतों की सहायता से ठीक से न चबाया जाये तो भोजन का काफी बड़ा भाग वैसे ही बिना पीसे रह जायेगा, ऐसे भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पायेगा। परिणामस्वरूप, कब्ज व बड़ी आँत से संबंधित अनेक बीमारियाँ पैदा होती हैं।
- ➤ महर्षि वाग्भट के नियमानुसार जिस भोजन को पकाते समय सूर्य का प्रकाश व पवन का स्पर्श ना मिले वह भोजन विष के समान है। प्रेशर कुकर में भोजन पकाते समय सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता। भोजन पकते सूर्य का प्रकाश मिलने के लिए बर्तन को बिना ढके भोजन पकाना होगा और बिना ढके पकाने से हवा का दबाव सामान्य रहता है परिणामस्वरूप प्रोटीन खराब नहीं होते। प्रेशर कुकर के अंदर भोजन पकाते समय हवा का दबाव वातावरण से दुगुना हो जाता है व तापमान 120 डिग्री सेण्टीग्रेड तक पहुँच जाता है जिसके फलस्वरूप दाल और सब्जी के प्रोटीन हानिकारक प्रोटीन हो जाते हैं। 'राजीव भाई' ने प्रेशर कुकर में पकाई दाल का जब परीक्षण कराया तो यह पाया कि 87% प्रोटीन नष्ट हो जाते हैं व आरोग्य के लिए हानिकारक हो जाते हैं।
- ➤ मिट्टी ऊष्णता की कुचालक है अतः मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से भोजन को धीरे-धीरे ऊष्णता प्राप्त होती है व परिणामस्वरूप भोजन के तत्व जैसे दाल-सब्जी आदि का प्रोटीन नहीं होने पाता व 100% प्रोटीन सुरक्षित रहते हैं। यदि काँसे के बर्तन में पकाया जाये तो कुछ प्रोटीन नष्ट हो जायेंगे व एल्युमीनियम के बर्तन में पकाने से 87% प्रोटीन आरोग्य के लिए हानिकारक हो जायेंगे और भोजन में कुछ एल्युमीनियम की मात्रा भी चली जायेगी जो अनेक बीमारियाँ भी उदाहरणार्थ- पार्किन्सन्स, एल्जाईमर आदि को उत्पन्न करेगी। मिट्टी के अंदर शरीर को आवश्यक सारे खनिज तत्व हैं। मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से मिट्टी का कुछ अंश भोजन में चला जाता है व यह मिट्टी पेट में जाने के बाद घुल जाती है व मिट्टी में उपस्थित सारे तत्व भोजन पचने के बाद रस में मिल जाते हैं व रक्त में पहुँच जाते हैं इस प्रकार मल-मूत्र द्वारा होने वाला खनिजों के क्षति की पूर्ति रोज हो जाया करती है व शरीर निरोगी रहता है। मुख्यतः खनिजों की पूर्ति भोज्य पदार्थ(अनाज, दालें, फल, सब्जियाँ) आदि के द्वारा होती है।
- ➤ सुबह उठते ही, पेशाब करने के बाद बिना मुँह धोए अपनी संतुष्टि तक पानी पियें। रात भर में हमारे मुख में Lysozyme नामक एक Antibiotic तैयार होता है शायद भगवान ने हमारी जीवाणुओं से रक्षा करने के लिए यह विधान बनाया हो। यह पानी पेट में जाकर पूरे पाचन संस्था को रोग के जीवाणु रहित कर देता है, दूसरे यह पूरे पाचन तंत्र को धोकर स्वच्छ कर देता है। कम से कम एक से दो ग्लास गुनगुना पानी पीना ही चाहिए। कई लोगों की धारणा है कि कम से कम आधे से एक लीटर पानी पियें पर अनुभव यह कहता है कि पानी की कोई
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