तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)
Taittiriya Aranyaka Hindi
महर्षि वैशम्पायन द्वारा
स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 632, कुल 940 में से
संदर्भ में पढ़ें५ प्रपाठके ७ अनुवाकः। ६१६
दति^{(१२)}। ^{(१३)}दानव स्थ पेर॒व इत्या॑ह। मेध्या॑ने॒वैना॑न् करोति^{(१३)}। ^{(१४)}विष्व॑ग्दृ॒तो लोहि॑ते॒नेत्या॑ह॒ व्यावृत्यै॑^{(१४)}। ^{(१५)}अ॒श्विभ्यां॑ पिन्वस्व॒ सर॑स्वत्यै पिन्वस्व पूष्णे पि॑न्वस्व॒ बृहस्पत॑ये पिन्व॒स्वेत्या॑ह। ए॒ताभ्यो॒ ह्ये॑षा दे॒वता॑भ्यः पिन्व॑ते^{(१५)}। ^{(१६)}इन्द्रा॑य पिन्व॒स्वेन्द्रा॑य पिन्व॒स्वेत्या॑ह। इन्द्र॑मे॒व भा॒गधेये॑न॒ समर्ध॑यति^{(१६)}। ^{(१७)}द्विरिन्द्रा॒येत्या॑ह ॥ ४ ॥
तस्मा॒दिन्द्रो॑ दे॒वता॑नां॒ भूयि॑ष्ठ भा॒क्तमः॑^{(१७)}। ^{(१८)}गाय॒त्रोऽ॑सि त्रैष्टु॒भोऽसि॒ जागतमसीति॑ शफो॒पय॑मानाद॒त्ते। छन्दो॑भिरे॒वैना॒नाद॑त्ते^{(१८)}। ^{(१९)}सहौजॊ॑ भा॒गेनाप॑मे॒हीत्या॑ह। ऊर्ज॑मे॒वैनं॑ भा॒गम॑कः^{(१९)}। ^{(२०)}अ॒श्विनौ॒ वा ए॒तद्य॒ज्ञस्य॒ शिरः॒ प्रति॑दध॑तावब्रूतां। आवाभ्या॑मेव पू॒र्वाभ्यां॒ वष॑ट् क्रियाता॒ इति॑। इन्द्रा॑श्विना॒ मधु॑नः सार॒घस्येत्या॑ह। अ॒श्विभ्या॑मे॒व पू॒र्वा-
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