भारतकोश
तन्त्रालोक (प्रथम भाग - जयरथ विवृति सहित)

तन्त्रालोक (प्रथम भाग - जयरथ विवृति सहित)

Tantraloka Vol 1 by Acharya Abhinavagupta with Jayaratha Commentary

आचार्य अभिनवगुप्त / राजानक जयरथ द्वारा

स्रोत: काश्मीर संस्कृत ग्रन्थावली · काश्मीर संस्कृत ग्रन्थावली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 299, कुल 368 में से

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श्लोक २६२ ] प्रथमाह्निकम् । २८६ विकल्पसंस्क्रिया तर्क- तत्त्वं गुरुसतत्त्वकम् । योगाङ्गानुपयोगित्वं कल्पितार्चाद्यनादरः ॥२८९॥ संविच्चक्रोदयो मन्त्र- वीर्यं जप्यादि वास्तवम् । निषेधविधितुल्यत्वं शाक्तोपायेऽत्र चर्च्यते ॥२६०॥ बुद्धिर्ध्यानं प्राणतत्त्व- समुच्चारश्चिदात्मता । उच्चारः परतत्त्वान्तः- प्रवेशपथलक्षणम् ॥२६१॥ करणं वर्णतत्त्वं चे- त्याणवे तु निरूप्यते । चारमानमहोरात्र- संक्रान्त्यादिविकल्पनम् ॥२६२॥ पं० १० घ० पु० समुच्चारस्तदात्मना इति पाठः । ३७

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