तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)
Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary
महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished294 पृष्ठ
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३६ ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ आ. ४ के द्वारा खिल उठा है उसमें ही रहस्य सहित बोधक्रम में मनोहर परिमल खिलता है । × × × मैं ही शिवनाथ हूँ अशेष जीव और तत्त्वों के परम विश्राम हूँ ऐसा नदन करता हुआ विमर्शरूपी भ्रमर प्रकाशरूप अपने लक्ष्य को धारण करता है । × × × श्री अभिनव गुप्ताचार्य विरचित तन्त्रसार के शाक्तोपाय प्रकाशन नाम चतुर्थ आह्निक है ।