भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ७ मनोज्ञामनोज्ञेन्द्रियविषयरागद्वेषवर्जनानि पञ्च ॥८॥ [ मनोज्ञामनोज्ञेन्द्रियविषयरागद्वेषवर्जनानि ] स्पर्शन आदि पाँचों इन्द्रियों के इष्ट-अनिष्ट विषयों के प्रति राग-द्वेष का त्याग करना [ पञ्च ] सो पाँच परिग्रहत्यागव्रत की भावनायें हैं। Giving up attachment and aversion for agreeable and disagreeable objects of the five senses constitutes five. हिंसादिष्विहामुत्रापायावद्यदर्शनम् ॥९॥ [ हिंसादिषु ] हिंसा आदि पाँच पापों से [ इह अमुत्र ] इस लोक में तथा परलोक में [ अपायावद्यदर्शनम् ] नाश की (दुःख, आपत्ति, भय तथा निंद्यगति की) प्राप्ति होती है - ऐसा बारम्बार चिन्तवन करना चाहिये। The consequences of violence etc. are calamity and reproach in this world and in the next. दुःखमेव वा ॥१०॥ [ वा ] अथवा ये हिंसादिक पाँच पाप [ दुःखमेव ] दुःखरूप ही हैं - ऐसा विचारना। Or sufferings only (result from injury etc.). 97