भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 177 में से

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अध्याय - ७ मैथुनमब्रह्म ॥१६॥ [ मैथुनमब्रह्म ] जो मैथुन है सो अब्रह्म अर्थात् कुशील है। मूर्च्छा परिग्रहः ॥१७॥ [ मूर्च्छा परिग्रहः ] जो मूर्च्छा है सो परिग्रह है। निश्शल्यो व्रती ॥१८॥ [ व्रती ] व्रती जीव [ निःशल्यः ] शल्य रहित ही होता है। अगार्यनगारश्च ॥१९॥ [ अगारी ] अगारी अर्थात् सागार (गृहस्थ) [ अनगारः च ] और अनगार (गृहत्यागी भावमुनि) इस प्रकार व्रती के दो भेद हैं। नोट- निश्चय सम्यग्दर्शन-ज्ञानपूर्वक महाव्रतों को पालने वाले मुनि अनगारी कहलाते हैं और देशव्रत को पालने वाले श्रावक सागारी कहलाते हैं। 100

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