भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ७ परविवाहकरणेत्वरिकापरिगृहीताऽपरिगृहीता- गमनानंगक्रीड़ाकामतिव्राभिनिवेशाः ॥२८॥ दूसरे के पुत्र-पुत्रियों का विवाह करना-कराना, पति-सहित व्यभिचारिणी स्त्रियों के पास आना-जाना, लेन-देन रखना, रागभाव पूर्वक बात-चीत करना, पति-रहित व्यभिचारिणी स्त्री (वेश्यादि) के यहाँ आना-जाना, लेन-देन आदि का व्यवहार रखना, अनंगक्रीड़ा अर्थात् कामसेवन के लिये निश्चित् अंगों को छोड़कर अन्य अंगों से कामसेवन करना और कामसेवन की तीव्र अभिलाषा - ये पाँच ब्रह्मचर्या वृत के अतिचार हैं। Bringing about marriage, intercourse with an unchaste married woman, cohabitation with a harlot, perverted sexual practices, and excessive sexual passion. क्षेत्रवास्तुहिरण्यसुवर्णधनधान्यदासीदासकुप्य- प्रमाणातिक्रमाः ॥२९॥ [ क्षेत्रवास्तुप्रमाणातिक्रमाः ] क्षेत्र और रहने के स्थान के परिमाण का उल्लंघन करना, [ हिरण्यसुवर्णप्रमाणातिक्रमाः ] चाँदी और सोने के परिमाण का उल्लंघन करना, [ धनधान्यप्रमाणातिक्रमाः ] धन (पशु आदि) तथा धान्य के 105