भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 121, कुल 177 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 121

अध्याय - ७ प्रवृत्ति करना और [ उपभोग-परिभोगानर्थक्यं ] भोग-उपभोग के पदार्थों का जरूरत से ज्यादा संग्रह करना - ये पाँच अनर्थदंडव्रत के अतिचार हैं। Vulgar jokes, vulgar jokes accompanied by gesticulation, garrulity, unthinkingly indulging in too much action, keeping too many consumable and non-consumable objects, are the five transgressions of the vow of desisting from unnecessary sin. योगदुष्प्रणिधानानादरस्मृत्यनुपस्थानानि ॥३३॥ [ योगदुष्प्रणिधानं ] मन सम्बन्धी परिणामों की अन्यथा प्रवृत्ति करना, वचन सम्बन्धी परिणामों की अन्यथा प्रवृत्ति करना, काय सम्बन्धी परिणामों की अन्यथा प्रवृत्ति करना, [ अनादर ] सामायिक के प्रति उत्साह रहित होना, [ स्मृत्यनुपस्थानं ] एकाग्रता के अभाव को लेकर सामायिक के पाठ आदि भूल जाना - ये पाँच सामायिक शिक्षाव्रत के अतिचार हैं। Misdirected three-fold activity, lack of earnestness, and fluctuation of thought, are the five transgressions of concentration. 108