भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 177 में से

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अध्याय - ७ जीवितमरणाशंसामित्रानुरागसुखानुबन्धनिदानानि ॥३७॥ [ जीविताशंसा ] सल्लेखना धारण करने के बाद जीने की इच्छा करना, [ मरणाशंसा ] वेदना से व्याकुल होकर शीघ्र मरने की इच्छा करना, [ मित्रानुरागः ] अनुराग के द्वारा मित्रों का स्मरण करना, [ सुखानुबन्ध ] पहले भोगे हुये सुखों का स्मरण करना और [ निदानं ] निदान करना अर्थात् आगामी विषय-भोगों की वांछा करना - ये पाँच सल्लेखनाव्रत के अतिचार हैं। Desire for life, desire for death, recollection of affection for friends, recollection of pleasures, and constant longing for enjoyment. अनुग्रहार्थं स्वस्यातिसर्गो दानम् ॥३८॥ [ अनुग्रहार्थं ] अनुग्रह-उपकार के हेतु से [ स्वस्यातिसर्गः ] धन आदि अपनी वस्तु का त्याग करना सो [ दानं ] दान है। Charity is the giving of one’s wealth to another for mutual benefit. विधिद्रव्यदातृपात्रविशेषात्तद्विशेषः ॥३९॥ [ विधिद्रव्यदातृपात्रविशेषात् ] विधि, द्रव्य, दातृ और पात्र की विशेषता से [ तद्विशेषः ] दान में विशेषता होती है। 111

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