तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ८ अथ अष्टमोऽध्यायः Bondage of Karma मिथ्यादर्शनाविरतिप्रमादकषाययोगा बन्धहेतवः ॥१॥ [ मिथ्यादर्शनाविरतिप्रमादकषाययोगाः ] मिथ्यादर्शन, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग - ये पाँच [ बंधहेतवः ] बन्ध के कारण हैं। Wrong belief, non-abstinence, negligence, passions, and activities are the causes of bondage. सकषायत्वाज्जीवः कर्मणो योग्यान्पुद्गलानादत्ते स बन्धः ॥२॥ [ जीवः सकषायत्वात् ] जीव कषायसहित होने से [ कर्मणः योग्यान्पुद्गलान् ] कर्म के योग्य पुद्गल परमाणुओं को [ आदत्ते ] ग्रहण करता है [ स बन्धः ] वह बन्ध है। The individual self attracts particles of matter which are fit to turn into karma, as the self is actuated by passions. This is bondage. प्रकृतिस्थित्यनुभवप्रदेशास्तद्विधयः ॥३॥ [ तत् ] उस बन्ध के [ प्रकृतिस्थित्यनुभवप्रदेशाः ] प्रकृतिबन्ध, स्थितिबन्ध, अनुभागबन्ध और प्रदेशबन्ध [ विधयः ] ये चार भेद हैं। 113