तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ९ The contemplation of objects of revelation, misfortune or calamity, fruition of karmas, and the structure of the universe, is virtuous concentration. शुक्ले चाद्ये पूर्वविदः ॥३७॥ [ शुक्ले चाद्ये ] पहले दो प्रकार के शुक्लध्यान अर्थात् पृथक्त्ववितर्क और एकत्ववितर्क - ये दो ध्यान भी [ पूर्वविदः ] पूर्वज्ञानधारी श्रुतकेवली के होते हैं। The first two types of pure concentration are attained by the saints well-versed in the pūrvas. परे केवलिनः ॥३८॥ [ परे ] शुक्लध्यान के अन्तिम दो भेद अर्थात् सूक्ष्मक्रियाप्रतिपाति और व्युपरतक्रियानिवर्ति ये दो ध्यान [ केवलिनः ] केवलि भगवान के होते हैं। The last two arise in the omniscients. पृथक्त्वैकत्ववितर्कसूक्ष्मक्रियाप्रतिपातिव्युपरत- क्रियानिवर्तीनि ॥३९॥ 141