भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - १० औपशमिकादिभव्यत्वानां च ॥३॥ [ च ] और [ औपशमिकादि भव्यत्वानां ] औपशमिकादि भावों का तथा पारिणामिक भावों में से भव्यत्व भाव का मुक्त जीव के अभाव होता है - हो जाता है। (Emancipation is attained) on the destruction of psychic factors also like quietism and potentiality. अन्यत्रकेवलसम्यक्त्वज्ञानदर्शनसिद्धत्वेभ्यः ॥४॥ [ केवलसम्यक्त्वज्ञानदर्शनसिद्धत्वेभ्यः अन्यत्र ] केवलसम्यक्त्व, केवलज्ञान, केवलदर्शन और सिद्धत्व, इन भावों के अतिरिक्त अन्य भावों के अभाव से मोक्ष होता है। Other than infinite faith, infinite knowledge, infinite perception, and infinite perfection. तदनन्तरमूर्ध्वं गच्छत्यालोकान्तात् ॥५॥ [ तदनन्तरम् ] तुरन्त ही [ ऊर्ध्वं आलोकान्तात् गच्छति ] ऊर्ध्वगमन करके लोक के अग्रभाग तक जाता है। Immediately after that the soul darts up to the end of the universe. 148