तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - १० धर्मास्तिकायाभावात् ॥८॥ [ धर्मास्तिकायाभावात् ] आगे (अलोक में) धर्मास्तिकाय का अभाव है अतः मुक्त जीव लोक के अन्त तक ही जाता है। As there is no medium of motion. क्षेत्रकालगतिलिंगतीर्थचारित्रप्रत्येकबुद्धबोधित- ज्ञानावगाहनान्तरसंख्याल्पबहुत्वतः साध्याः ॥९॥ [ क्षेत्रकालगतिलिंगतीर्थचारित्रप्रत्येकबुद्धबोधित- ज्ञानावगाहनान्तरसंख्याल्पबहुत्वतः ] क्षेत्र, काल, गति, लिंग, तीर्थ, चारित्र, प्रत्येकबुद्धबोधित, ज्ञान, अवगाहना, अन्तर, संख्या और अल्पबहुत्व - इन बारह अनुयोगों से [ साध्याः ] मुक्त जीवों (सिद्धों) में भी भेद सिद्ध किये जा सकते हैं। The emancipated souls can be differentiated with reference to the region, time, state, sign, type of Arhat, conduct, self-enlightenment, enlightened by others, knowledge, stature, interval, number, and numerical comparison. ॥ इति तत्त्वार्थाधिगमे मोक्षशास्त्रे दशमोऽध्यायः ॥ ⁂ 150