भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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अध्याय - २ अथ द्वितीयोऽध्यायः The Category of the Living औपशमिकक्षायिकौ भावौ मिश्रश्च जीवस्य स्वतत्त्वमौदयिकपारिणामिकौ च ॥१॥ [ जीवस्य ] जीव के [ औपशमिकक्षायिकौ ] औपशमिक और क्षायिक [ भावौ ] भाव [ च मिश्रः ] और मिश्र तथा [ औदयिक-पारिणामिकौ च ] औदयिक और पारिणामिक यह पाँच भाव [ स्वतत्त्वम् ] निजभाव हैं अर्थात् यह जीव के अतिरिक्त दूसरे में नहीं होते। The distinctive characteristics of the soul are the dispositions (thought-activities) arising from subsidence, destruction, destruction-cum- subsidence of karmas, the rise of karmas, and the inherent nature or capacity of the soul. द्विनवाष्टादशैकविंशतित्रिभेदाः यथाक्रमम् ॥२॥ उपरोक्त पाँच भाव [ यथाक्रमम् ] क्रमशः [ द्वि नव अष्टादश एकविंशति त्रिभेदाः ] दो, नव, अट्ठारह, इक्कीस और तीन भेद वाले हैं। 15