भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 177 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 33

अध्याय - २ संसारिणो मुक्ताश्च ॥१०॥ जीव [ संसारिणः ] संसारी [ च ] और [ मुक्ताः ] मुक्त - ऐसे दो प्रकार के हैं। कर्म सहित जीवों को संसारी और कर्म रहित जीवों को मुक्त कहते हैं। The transmigrating and the emancipated souls. समनस्काऽमनस्काः ॥११॥ संसारी जीव [ समनस्काः ] मनसहित-सैनी [ अमनस्काः ] मनरहित-असैनी, यों दो प्रकार के हैं। (The two kinds of transmigrating souls are those) with and without minds. संसारिणस्त्रसस्थावराः ॥१२॥ [ संसारिणः ] संसारी जीव [ त्रस ] त्रस और [ स्थावराः ] स्थावर के भेद से दो प्रकार के हैं। The transmigrating souls are (of two kinds), the mobile and the immobile beings. 20