तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ३ जम्बूद्वीपलवणोदादयः शुभनामानो द्वीपसमुद्राः ॥७॥ इस मध्यलोक में अच्छे-अच्छे नाम वाले जम्बूद्वीप इत्यादि द्वीप, और लवणसमुद्र इत्यादि समुद्र हैं। Jambūdvīpa, Lavaṇoda, and the rest are the continents and the oceans with auspicious names. द्विर्द्विविष्कम्भाः पूर्वपूर्वपरिक्षेपिनो वलयाकृतयः ॥८॥ प्रत्येक द्वीप-समुद्र दूने-दूने विस्तार वाले और पहिले-पहिले के द्वीप-समुद्रों को घेरे हुए चूड़ी के आकार वाले हैं। (These) are of double the diameter of the preceding ones and circular in shape, each encircling the immediately preceding one. तन्मध्ये मेरुनाभिर्वृत्तो योजनशतसहस्रविष्कम्भो जम्बूद्वीपः ॥९॥ उन सब द्वीप-समुद्रों के बीच में जम्बूद्वीप है, उसकी नाभि के समान सुदर्शन मेरु है, तथा जम्बूद्वीप थाली के समान गोल है और एक लाख योजन उसका विस्तार है। 39