तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ३ ( भरत में) गंगा, सिंधु, (हैमवत में) रोहित, रोहितास्या, (हरिक्षेत्र में) हरित्, हरिकान्ता, (विदेह में) सीता, सीतोदा, (रम्यक् में) नारी, नरकान्ता, (हैरण्यवत् में) स्वर्णकूला, रूप्यकूला और (ऐरावत में) रक्ता, रक्तोदा, इस प्रकार ऊपर कहे हुए सात क्षेत्रों में चौदह नदियाँ बीच में बहती हैं। द्वयोर्द्वयोः पूर्वाः पूर्वगाः ॥२१॥ (ये चौदह नदियाँ दो के समूह में लेना चाहिये) हर एक दो के समूह में से पहली नदी पूर्व की ओर बहती है (और उस दिशा के समुद्र में मिलती है)। शेषास्त्वपरगाः ॥२२॥ बाकी रही सात नदियाँ पश्चिम की ओर जाती हैं (और उस तरफ के समुद्र में मिलती हैं)। 44