तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ३ भरतस्य विष्कम्भो जम्बूद्वीपस्य नवतिशतभागः ॥३२॥ भरत क्षेत्र का विस्तार जम्बूद्वीप के एक सौ नव्वेवाँ (190) भाग के बराबर है। The width of Bharata is one hundred and ninetieth (1/190) part of that of Jambūdvīpa. द्विर्धातकीखण्डे ॥३३॥ धातकीखण्ड नाम के दूसरे द्वीप में क्षेत्र, कुलाचल, मेरु, नदी इत्यादि सब पदार्थों की रचना जम्बूद्वीप से दूनी-दूनी है। In Dhātakīkhaṇḍa it is double. पुष्करार्द्धे च ॥३४॥ पुष्करार्द्ध द्वीप में भी सब रचना जम्बूद्वीप की रचना से दूनी-दूनी है। In the (nearest) half of Puṣkaradvīpa also. 48