भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 177 में से

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अध्याय - ५ नित्यावस्थितान्यरूपणि ॥४॥ ऊपर कहे गये द्रव्यों में से चार द्रव्य [ अरूपाणि ] रूप रहित [ नित्यावस्थितानि ] नित्य और अवस्थित हैं। (The substances are) eternal, fixed in number and colourless (non-material). रूपिणः पुद्गलाः ॥५॥ [ पुद्गलाः ] पुद्गल द्रव्य [ रूपिणः ] रूपी अर्थात् मूर्तिक हैं। Things which have form constitute matter (pudgalas). आ आकाशादेकद्रव्याणि ॥६॥ [ आ आकाशात् ] आकाश पर्यन्त [ एकद्रव्याणि ] एक एक द्रव्य हैं अर्थात् धर्म द्रव्य, अधर्म द्रव्य और आकाश द्रव्य एक एक हैं। The substances (mentioned in the first sutra) up to space are indivisible wholes (i.e. each is one single continuum). 67

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