भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 177 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 86

अध्याय - ५ वर्तनापरिणामक्रियाः परत्वापरत्वे च कालस्य ॥२२॥ [ वर्तनापरिणामक्रियाः परत्वापरत्वे च ] वर्तना, परिणाम, क्रिया, परत्व और अपरत्व [ कालस्य ] काल द्रव्य के उपकार हैं। Assisting substances in their continuity of being (through gradual changes), in their modifications, in their movements and in their priority and non- priority in time, are the functions of time. स्पर्शरसगन्धवर्णवन्तः पुद्गलाः ॥२३॥ [ स्पर्श रस गन्ध वर्णवन्तः ] स्पर्श, रस, गन्ध और वर्ण वाले [ पुद्गलाः ] पुद्गल द्रव्य हैं। The forms of matter are characterized by touch, taste, smell and colour. शब्दबन्धसौक्ष्म्यस्थौल्यसंस्थानभेदतमश्छायाऽऽतपोद्योत- वन्तश्च ॥२४॥ उक्त लक्षणवाले पुद्गल [ शब्द बन्ध सौक्ष्म्य स्थौल्य संस्थान भेद तमश्छायाऽऽतपोद्योतवन्तः च ] शब्द, बन्ध, सूक्ष्मता, स्थूलता, संस्थान (आकार), भेद, अन्धकार, छाया, आतप और उद्योतादि वाले होते हैं, अर्थात् ये भी पुद्गल की पर्यायें हैं। 73