तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंयुद्धोन्माद के थमने के बाद विजयनगर में एक विजयोत्सव का आयोजन हुआ। इस आयोजन में तेनाली राम एक त्रिपुंड्रधारी ब्राह्मण के वेश में उपस्थित हुआ। विजयोल्लास में विजयनगर की प्रजा भी शामिल थी। महाराज कृष्णदेव राय ने ‘सप्तद्वीप नवखंड’ के बंदी राजा विचित्र भानु को भी उचित आसन देकर बैठाया। यह समारोह सैन्य बलों के उत्साहवर्द्धन के लिए था-इसलिए आयोजन में सेना के जवानों द्वारा विविध सैन्य कलाओं का प्रदर्शन हुआ है। इस बीच ही एक पारदर्शी पात्र में पानी लेकर तेनाली राम मंच पर आया और बोला, “बंधुओ, यह जलपात्रा विजयनगर है। विजयनगर के निवासी इसमें भरे पानी की तरह हैं जिन्हें कोई भी खंडित नहीं कर सकता। पानी निकालो-थोड़ा-सा इस पात्रा से...देखो इसमें कोई गढ्ढा नहीं पड़ेगा-पानी समानता में बँटेगा- और यह पड़ोसी राज्य सप्तद्वीप नवखंड हमारे लिए इस पुडिया की तरह है...” तेनाली राम ने अपना दूसरा हाथ ऊपर उठाकर लोगों को दिखाया। उसकी उँगलियों में एक पुड़िया दबी थी। तेनाली राम ने उस पुड़िया को पानी में डाल दिया। पात्र का पानी लाल हो उठा लेकिन पुड़िया पानी में गल गई!... लोग हँसने लगे। तेनाली राम ने फिर लोगों से पूछा, “समझे कुछ?” भीड़ से समवेत स्वर उभरा, “मिट गया सप्तद्वीप नवखंड का अस्तित्व!” तभी सप्तद्वीप नवखंड का महाराज विचित्र भानु अपने आसन से उठा और महाराज कृष्णदेव राय के सम्मुख घुटने के बल खड़ा होकर हाथ जोड़कर बोला, “महाराज! मेरे अपराध क्षमा करें!“ और इसके बाद उसके गले से कोई बोल नहीं फूटा। महाराज कृष्णदेव राय ने विचित्र भानु का कन्धा पकड़कर उठाया...उसी समय तेनाली राम ने कहा, “और आरम्भ हुआ नया सह-अस्तित्व!” विजयनगर की प्रजा की तालियों की अनुगूँज के बीच महाराज कृष्णदेव राय सप्तद्वीप नवखंड के राजा विचित्र भानु को क्षमा कर अपने गले से लगा रहे थे।