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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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प्रहरियों ने तेनाली राम को आदरपूर्वक महाराज के कक्ष तक पहुँचा दिया। तेनाली राम को देखकर महाराज ने कहा, “आओ तेनाली राम! आज तुम्हें मैं एक महत्त्वपूर्ण काम सौंप रहा हूँ। यह एक ऐसा काम है जिसके लिए अतिविश्वसनीय व्यक्ति की आवश्यकता है। यह कहने की आवश्यकता नहीं कि मेरे लिए तुम कितने विश्वसनीय हो।” तेनाली राम के होंठों पर उस समय मन्द-हास उभर आया था। उसने महाराज से कहा, “महाराज! आप आज्ञा दें! आपके विश्वास को मैं जीते-जी ठेस नहीं पहुँचने दूँगा।...” महाराज कृष्णदेव राय ने स्वर्ण-मुद्राओं की एक थैली तेनाली राम को सौंपते हुए कहा, “तेनाली राम! कल सुबह तुम विजयनगर के दूत बनकर बादशाह बाबर को हमारी ओर से मित्र राज्य बनने की स्वीकृति का सन्देश देने दिल्ली प्रस्थान करो। घुड़साल से अपनी पसन्द का घोड़ा लेकर तुम प्रस्थान करो और यथाशीघ्र दिल्ली पहुँचकर बादशाह बाबर को हमारा सन्देश दो। उन्हें तुम ही हमारी बात सही ढंग से समझा सकते हो इसलिए तुम्हें यह कार्य सौंप रहा हूँ।” “ जो आज्ञा महाराज!”तेनाली राम ने कहा और महाराज से आज्ञा लेकर अपने घर लौटा। दूसरे दिन सुबह दिल्ली के लिए उसकी यात्रा आरम्भ हो गई। यह उन दिनों की बात है जब विजयनगर से दिल्ली की यात्रा बहुत आसान नहीं थी। सड़कें आज की तरह न तो आबाद थीं और न ही दिल्ली की राह में कहीं विश्राम करने की कोई सार्वजनिक व्यवस्था थी। यात्रियों को अपने व्यवहार-कौशल और बुद्धि-चातुर्य से ही आश्रय प्राप्त करना होता था। तेनाली राम कुशाग्र बुद्धि तो था ही इसलिए उसे मार्ग में किसी तरह के संकट का सामना करना नहीं पड़ा। दिल्ली पहुँचकर वह सीधे बाबर के दरबार में उपस्थित हुआ। बाबर को जब सूचना मिली कि विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय का एक दूत दिल्ली-दरबार में बादशाह के सम्मुख उपस्थित होने का आदेश चाहता है तो बाबर ने तेनाली राम को यथाशीघ्र दरबार में उनके समक्ष उपस्थित किए जाने का निर्देश दिया। तेनाली राम को बाबर के सम्मुख उपस्थित किया गया। बाबर ने तेनाली राम को पारखी दृष्टि से देखा। विजयनगर से लौटकर बाबर के दूत ने तेनाली राम की तर्कसंगत बातों का विवरण दिया था। बाबर ने तेनाली राम को ऊपर से नीचे तक गम्भीर दृष्टि से देखा और कहा, ”दूत! आज तुम विश्राम करो। दक्षिण से उत्तर की दूरी तय करने में तुम थक गए होगे। कल सुबह दरबार में उपस्थित होकर अपना ‘सन्देश’ देना।“ बाबर के संकेत पर बारशाह के दो प्रहरी तेनाली राम को अतिथिशाला की ओर ले गए। तेनाली राम के विदा होते ही बाबर ने उस दरबारी को बुलाया जिसे दूत बनाकर विजयनगर भेजा गया था। बाबर ने उस दरबारी से पूछा, “शराफत अली, बताओ, इस