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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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खेत का उपदेश महाराज कृष्णदेव राय अपने प्रिय सभासद तेनाली राम के साथ प्रायः विजयनगर के भ्रमण के लिए निकल जाते थे। प्रजा का दुख-दर्द जानने का उन्हें अपना यह तरीका बहुत पसन्द था। इस तरह के भ्रमण से जहाँ वे अपने राज्य की समस्त सूचनाओं से भिज्ञ रहते थे, वहीं अपने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के मनोभावों से भी परिचित होते थे। तेनाली राम को वे इस तरह की यात्राओं के समय हमेशा साथ रखते थे। उसका एकमात्र कारण यह था कि तेनाली राम उनके मनोभावों को आसानी से समझ लेता था और स्थिति देखकर उसके अनुकूल आचरण करना जानता था। एक बार विजयनगर में अच्छी बारिश हुई। समय पर अच्छी वर्षा हो जाने से फसल भी बहुत अच्छी हुई जिससे विजयनगर के कृषकों में काफी खुशी थी। महाराज तेनाली राम के साथ प्रदेश की यात्रा पर थे। वे एक गाँव से दूसरे गाँव जाते और ग्रामीणों की वास्तविक दशा से अवगत होकर आगे बढ़ जाते। वे तेनाली राम के साथ ही किसी गाँव में पड़ाव डालकर रात बिताते और सुबह होते ही आगे बढ़ जाते। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था। एक दिन महाराज तेनाली राम के साथ एक गाँव से गुजर रहे थे। रास्ते में धान के एक खेत में एक किसान उल्लसित भाव में बैठा हुआ मिल गया। महाराज ने उसके पास जाकर कहा, “भगवान की कृपा से इस बार फसल बहुत अच्छी हुई है-है न!” उस किसान ने महाराज और तेनाली राम को सामान्य राहगीर समझा और बहुत दर्प के साथ उत्तर दिया, “अरे भाई! इसमें भगवान की कृपा जैसी कोई बात नहीं है। खेत में कुछ भी भगवान की कृपा से नहीं उगता है। उगता है अच्छे बीज, खाद, सिंचाई और निराई के कारण। अभी जो यह लहलहाता हुआ खेत देख रहे हो, वह मेरी मेहनत के कारण है, भगवान की कृपा के कारण नहीं। मैंने कड़ी धूप में इस खेत में कुदाल चलाया, कड़ी मेहनत कर मिट्टी तैयार की, बारिश में भीग-भीगकर बुआई की, लगातार सतर्क रहा, समय पर सिंचाई की, रात में जगकर फसल की रखवाली की। तब जाकर यह खेत इस तरह लहलहाया है। यह मेरी लगातार मेहनत का परिणाम है। जो भी मेहनत करेगा, खेत उसके लिए अच्छी पैदावार देगा ही। यही नियम है। न तो यह भाग्य का खेल है और न ही ईश्वरीय चमत्कार!” तेनाली राम ने किसान को इस तरह अतिविश्वास में बोलते सुना तब किसान से कहा, “हाँ, तुम ठीक कहते हो, मेहनत करनेवालों को ही उसका अच्छा फल भी प्राप्त होता है।” इतना कहकर उसने महाराज को आगे बढ़ने का संकेत किया।