तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 45, कुल 118 में से
संदर्भ में पढ़ेंपंडित का आशिष महाराज कृष्णदेव राय धर्म में आस्था रखते थे और समय-समय पर तीर्थस्थलों का भ्रमण कर वहाँ के देवालयों में पूजा-अर्चना करते थे। एक बार महाराज द्रविड़ राज्य के तीर्थस्थलों का भ्रमण करने गए। वहाँ एक देवालय में उन्हें एक तेजस्वी पुजारी के दर्शन हुए। वह पुजारी प्रकांड पंडित थे। समस्त शास्त्रों के ज्ञाता। महाराज उनसे बात कर बहुत सन्तुष्ट हुए। उनके मन के अनेक संशयों का निवारण भी इस बातचीत में हो गया। महाराज पुजारी के पास से संशय मुक्त होकर उठे और बहुत विनम्र भाव से पुजारी को कभी विजयनगर आने का न्योता दिया। पुजारी राजा कृष्णदेव राय के व्यवहार से बहुत प्रसन्न हुए और महाराज को आश्वस्त किया कि जब कभी भी उचित अवसर आएगा, वह विजयनगर अवश्य आएँगे। इस घटना के कुछ वर्ष बाद एक दिन महाराज अपने दरबार में बैठे थे। सभा की कार्रवाई चल रही थी। तभी महाराज के सामने द्वारपाल उपस्थित हुआ और बोला, “महाराज! द्रविड़ राज्य से एक त्रिपुंड्रधारी ब्राह्मण आया हुआ है और आपसे मिलने की अनुमति चाहता है।” महाराज को अपनी द्रविड़-यात्रा का स्मरण हो आया। उन्हें स्मरण हो गया कि वहाँ एक पुजारी से उन्होंने विजयनगर आने का आग्रह किया था। स्मृति में यह बात कौंधते ही महाराज अपने सिंहासन से उठ खड़े हुए और अपने आसन के पास एक और आसन लगाए जाने का निर्देश देते हुए तत्पर हो गए। उन्होंने द्वारपाल को उस ब्राह्मण को आदरसहित राजदरबार में लाने का निर्देश दिया। पुजारी जब राजसभा में आए तब सभी सभासदों ने अपने आसन से उठकर उनका स्वागत किया। महाराज ने पुजारी के चरण छुए और उन्हें अपने आसन के समीप रखे गए आसन पर बैठाया। महाराज के आग्रह पर पुजारी ने सभासदों को सफलता के सूत्र बताए। पुजारी की बातें सुनकर सभासद भी आह्लादित हुए। अपना उपदेश समाप्त कर पुजारी ने महाराज से कहा, “राजन्, अब मुझे चलना चाहिए। मैं देवालयों में देव दर्शन के लिए निकला हूँ। मुझे स्मरण था कि मैंने आपको आश्वासन दिया था कि उचित अवसर पर मैं विजयनगर आऊँगा। इसलिए आपके पास आया और अपना वचन पूरा किया।” महाराज कृष्णदेव राय ने विनयपूर्वक त्रिपुंड्रधारी पुजारी को रोक लिया। महाराज ने पुजारी से कहा कि विजयनगर में भी अनेक प्रसिद्ध मन्दिर हैं, वहाँ भी पुजारी चाहें तो देव