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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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तेनाली राम से पूरा वृत्तान्त जानने के बाद महाराज ने उसे अपने गले से लगा लिया और कहा, “भविष्य में भी तुम मेरे आचरण पर दृष्टि रखना। यदि कभी मैं कर्तव्यविमुख होता दिखूँ तो इस बात की ओर मेरा ध्यान आकृष्ट करने के लिए जो भी उचित जान पड़े, करना।” उस दिन से ही महाराज कृष्णदेव राय पहले की भाँति दरबार में जाने लगे। महाराज को सक्रिय और सजग देखकर सभासदों में भी उत्साह पैदा हो गया और विजयनगर में पैदा हुई उदासीनता समाप्त हो गई।