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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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“हाँ! तुम ठीक कह रहे हो। फिर क्या समाधान है?” महाराज ने पूछा। “महाराज! यदि यह फरियादी निन्यानबे रुपए खर्च करने के लिए तैयार हो जाए तो मैं उसे समस्या से मुक्त करा दूँगा।” तेनाली राम ने कहा। महाराज ने पूछा, “फरियादी! क्या तुम निन्यानबे रुपए खर्च करने की स्थिति में हो?” “यदि समस्या से मुक्ति मिल जाए तो मैं निन्यानबे क्या, सौ रुपए भी खर्च कर सकता हूँ।” फरियादी ने कहा। “नहीं, केवल निन्यानबे रुपए।” इस बार यह बात तेनाली राम ने कही। “जी हाँ, श्रीमान! मैं निन्यानबे रुपए खर्च कर सकता हूँ।” फरियादी ने कहा। ”तो ठीक है, जाओ और निन्यानबे रुपए गिनकर एक मखमल की थैली में डाल दो। और जिस समय मोची कमरे में नहीं हो, उस समय उसके कमरे में वह थैली डाल दो। ऐसा करने के एक सप्ताह बाद आकर महाराज को उसके भजन का हाल बताना। अब जाओ, और जाकर वही करो जो मैंने तुम्हें बताया है।” तेनाली राम ने कहा। फरियादी महाराज के दरबार से बहुत आशंकित मन से लौटा। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह उसकी समस्या का कोई समाधान है। वह मन-ही-मन सोचता जा रहा था, ‘आज के जमाने में गरीबों की कौन सुनता है कि राजा-महाराजा सुनेंगे! खैर, चलो! यहाँ आए तो निन्यानबे के चक्कर में पड़े। न आते तो अच्छा था।” अपने घर पहुँचकर फरियादी ने मखमल की थैली में निन्यानबे रुपए गिनकर डाले और मोची के कमरे में फेंक आया। उसे इसका कोई परिणाम मिलने की आशा नहीं थी। दूसरी तरफ महाराज भी तेनाली राम की सलाह से सहमत नहीं थे। उन्होंने तेनाली राम से पूछा, “तेनाली राम! तुमने उस फरियादी को निन्यानबे रुपए की थैली मोची के कमरे में फेंकने की सलाह तो दे दी लेकिन इससे क्या होगा, मुझे बताओ।” “महाराज! इससे मोची निन्यानबे के चक्कर में पड़ जाएगा।” तेनाली राम ने हँसते हुए कहा। “निन्यानबे के चक्कर में?” महाराज ने चैंककर फिर पूछा। “यह निन्यानबे का चक्कर क्या है? मुझे खुलकर बताओ। साफ-साफ।” “महाराज, यह मोची किसी के पास काम नहीं करता। यह अपनी दुकान लगाता है।