भारतकोश
त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

Tripura Rahasya Jnana Khanda with Hindi Commentary

महर्षि दत्तात्रेय / भगवान् परशुराम द्वारा

DevanagariHindipublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 398, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 398

३८४ त्रिपुरारहस्ये ज्ञानखण्डे वह्नागमो ९७ | भय द्वितीय ३१६ | भृङ्गरुंघस्य ६४ बालं माता १४० | भविष्यं १४१ | मृत्यो ४३ बाह्यं शरीर ४० | भाति सत्या २०६ | भेदप्रचुर २०१ बाह्यमन्यक्त ३६० | भार्गवाय २२३ | भेदलेशमपि ३६२ बिम्बानुकृति २२६ | भार्गवैवं २५९ | भोगवैरस्य ११२ बिम्बापेक्षा १५४ | भावकालौ २६५ | भेदस्सर्वै २०४ वीभत्सान् ६६ | भावना १८८ | भोगाहुतौ ६८ बुद्धिनैर्मल्य ३२४ | भावनाप्रभवं १९० | भोगेषु ५१ बुद्धिमन्तो १७८ | भावनामात्र २०५ | भोगेषु ५६ बुद्धेस्तु ३३७ | भावनायाः १९१ | भोज्यं ५६ बुद्धौ तु ३१९ | भावयेत्स्वा २०७ | भ्रमन् २९५ बुवोधयिषती ३७ | भावानां २६५ | भ्रात्रादस्तव १८१ बुभुजे ६० | भावाभावा २६३ | भ्रान्तिः २६८ बुभुजे तां ४२ | भावितं २०४ | म बोधयामास १६६ | भासकं २६० | मज्जितं २१४ ब्रवीमि १६६ | भासकं तु १९८ | मणिद्वीपे ३६२ ब्रह्मन् ३५० | भासकस्या १९६ | मत्वा ३०९ ब्रह्मक्षेत्रं २५८ | भासते २६६ | मत्वा ज्वालां ९९ ब्रह्मभावनया १९१ | भासते १६१ | मदर्थभूत ११९ ब्रह्मविष्णु २९८ | भासमानं २८९ | मदेकसङ्गा ७७ ब्रूहि का २१३ | भासमानत्वतः २७४ | मदिरां ४२ ब्रूहि किं १३५ | भासमानस्य १२० | मधुक्षीव १४२ ब्रूहि यत्ते | भासयंस्तत्र २७२ | मधुक्षीवा २८६ भ | भासयेद् १९८ | मध्यज्ञानी ३३७ भक्त्या ३३१ | भास्यं तु १९८ | मध्यमस्य ३५७ भक्षयामासु १९ | भास्यभेदेऽपि २३७ | मध्यानां ३५५ भक्षिणी २३९ | भिन्नस्थितीन् २९९ | मध्ये मध्ये ३३५ भक्तितस्यापि ५१ | भीतापचारात् ३२ | मनसाऽप्येव २२८ भगवन् १३ | भुवनान्यपि १७३ | मनसैव २६७ भगवन् २०७ | भूतान्या २७७ | मनुष्यादि २७२ भगवन् २६६ | भूयः किं २५५ | मनोबुद्धिश्च १२० भगवन् ३०७ | भूयः पश्यामि १२१ | मनोभूमे ३०२ भगवन् ३४९ | भूय इच्छा ५४ | मनोमात्र १७१ भगवन् कृपया १५ | भूय एवंविधा ३०२ | मनो यदि ३०१ भगवन् गुरुणा २७ | भूयस्त्व ३५० | मनो यद्यात्मनो २६७ भगवन्नद्भुतं २२३ | भूयो ज्ञान ३५६ | मनो विलीन २३६ भगवन् श्री १४४ | भूयोऽति २१९ | मनो वै ३०५ भगवांस्तु १०५ | भूयो दृष्टं १४६ | मन्दज्ञानिभि १५६ भक्षध्वं १४२ | भृगुरत्रि ३०७ | मन्ये सर्वं ४

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक) · पृष्ठ 398, कुल 404 में से · BharatKosha