भारतकोश
त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

Tripura Rahasya Jnana Khanda with Hindi Commentary

महर्षि दत्तात्रेय / भगवान् परशुराम द्वारा

DevanagariHindipublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 402, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 402

३८८ त्रिपुरारहस्ये ज्ञानखण्डे व्यवहार ४ | शृन्मास्थया ७१ | श्रुतं त्व १७० व्यवहार ३०८ | शृणुध्व ३०९ | श्रुतमेत ३५९ व्यवहार ३१८ | शृणुध्व ३११ | श्रुता विचारिता ३२८ व्यवहारः ३५० | शृणु प्रिय १२७ | श्रुतितो ३१५ व्यवहारपरा ३०५ | शृणु ब्रह्मान् २३६ | श्रुतो न ३६६ व्यवहारपरो ३२६ | शृणु ब्रह्मान् २४० | श्रुत्वा १६९ व्यर्था २९३ | शृणु ब्रह्मन् २४३ | श्रुत्वाऽपूर्वं ५१ व्याप्या १३५ | शृणु ब्रह्मन् ३५१ | श्रुत्वेत्थं १०२ व्यावृत्ति २७५ | शृणु राज ४१ | श्रुत्वेत्थं ११४ व्यावृत्तिर्वा २७५ | शृणु राज १३५ | श्रुत्वेत्थं २२९ व्रजाम्यहं २२२ | शृणु राजन् ८२ | श्रुत्वैतदथ ३४५ श | शृणु राजन् १६८ | श्रुत्वैतद्वा २२३ शक्येषु १२१ | शृणु राजन् १८४ | श्रुत्यैवं १४४ शक्तितोऽमर्पित ४३ | शृणु राजन् १९२ | श्रुत्वैवं २३० शचीगृहं ४३ | शृणु राजन् १९५ | श्रुत्वैवं ३४९ शश एवमहं ३४७ | शृणु राजन्नयं १७५ | श्रेयः प्राप्नोति २९७ शयनानि ६५ | शृणु राम २८ | श्रेयस्तद्धि ९३ शरीराद्या २६० | शृणु राम १४५ | श्रेयो न ८६ शशास १६२ | शृणु राम १६१ | स शान्त ३४७ | शृणु राम २८८ | संक्षेपेण ३५९ शारदं २१२ | शृणु वक्ष्ये ९१ | संयोगो ३१७ शासन् १३८ | शृण्वन्तु ३१४ | संयोज्य १७१ शास्त्राणि १४० | शृण्वत्र ३३० | संवर्त्तभव १४ शिवं शैवोसमा १९७ | शेपिता १६३ | संवेदनं २०७ शिवस्य ३५८ | शैललोक १७६ | संश्रुत्यैवं १२ शिष्योऽहं २१८ | शैललोके १८८ | स एको ७४ शीतकाले ३९ | शोकसंविग्न ५५ | स एव ७५ शीतप्रकृति २९ | शोकातुर ९४ | स एव १०४ शुश्रूष्या ८० | शोचस्य ३९ | स एव १५८ शुक्रः १०७ | शोचन्तमिव ५६ | स एव २७७ शुद्धदर्पण ३६३ | श्रद्धया ९३ | स एव ३६४ शुद्धिविद्यति २०१ | श्रद्धा माता ८२ | स एव भूयः ३६० शुद्धे मनसि २३१ | श्रद्धामात्रा २४५ | स एवाद्य ८२ शुद्धैकरूप २७२ | श्रद्धाऽथरे ८४ | स कर्त्ता १०४ शुभं वाप्य २१ | श्रद्धावैधुर्य ८३ | सकर्तृकं १४८ शुभं वाप्यशुभं २५ | श्रद्धा हि ! ८३ | स केवलं २ शुभ्रकतंक ७९ | श्रीगुरो ११ | सखी न ८० शुभा भूति ९३ | श्री नायेनाम्य ५ | सखीदुःखा ७१ | श्रुतं कश्चिन्ना १ |