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उपदेशसाहस्री (आदि शङ्कराचार्य - गद्य व पद्य भाग)

Upadesha Sahasri of Adi Shankaracharya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: रामकृष्ण मठ · रामकृष्ण मठ (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished336 पृष्ठ

314 A THOUSAND TEACHINGS PAGE PAGE सन्निधौ सर्वदा तस्य 226 सिद्धो मोक्षस्त्वमित्येतत् 281 सबाह्याभ्यन्तरे शुद्धे 138 सिद्धो मोक्षोऽहमित्येव 280 सबाह्याभ्यन्तरोऽजीर्णः 204 सुखादेर्नात्मधर्मत्वम् 184 सभयादभयं प्राप्तः 285 सुषुप्तजाग्रत्स्वपतः 112 समं तु तस्मात्सततम् 298 सुषुप्तवज्जायति यः 115 समस्तं सर्वगं शान्तम् 161 सुषुप्त्याख्यं तमोऽज्ञानम् 199 समाधिर्वाऽसमाधिर्वा 132 सूक्ष्मताव्यापिते ज्ञेये 107 समापय्य क्रियाः सर्वाः 79 सूक्ष्मैकागोचरेभ्यश्च 185 समाप्तैस्तर्हि दुःखस्य 274 सेतुं सर्वव्यवस्थानाम् 213 सम्बन्धग्रहणं शास्त्रात् 242 सेत्स्यतीत्येव चेत्तस्यात् 279 सम्बन्धानुपपत्तेश्च 182 सोऽध्यासो नेतिनेतीति 224 सम्भाव्यो गोचरे शब्दः 225 सोपाधिश्चैवमात्मोक्तः 159 सम्यक्संशयमिथ्योक्ताः 254 स्थानावच्छेददृष्टिः स्यात् 173 सर्वज्ञोऽप्यत एव स्यात् 159 स्थावरं जंगमं चैव 141 सर्वप्रत्ययसाक्षित्वात् 156 स्थितो दीपो यथायत्नः 169 सर्वप्रत्ययसाक्षी ज्ञः 161 स्पष्टत्वं कर्मकर्त्रादेः 259 सर्वमात्मेति वाक्यार्थे 284 स्मरतो दृश्यते दृष्टम् 151 सर्वमूर्तिवियुक्तं यत 133 स्यान्मालाऽपरिहार्या तु 185 सर्वस्यात्माहमेवेति 212 स्वप्नः सत्यो यथाऽऽबोधात् 117 सर्वेषां मनसो वृत्तम् 116 स्वप्नस्मृत्योर्घटादेर्हि 136 साक्षाद्देवः स विज्ञेयः 201 स्वप्ने तद्गतप्रबोधे यः 196 सादित्यं हि जगत्प्राणः 140 स्वप्ने दुःखयहमध्यासम् 274 सिद्धादेवाहमित्यस्मात् 219 स्वभावशुद्धे गगने 150 सिद्धिः स्यात्स्वात्मलाभश्चेत् 259 स्वयंज्योतिर्न हि द्रष्टुः 247 सिद्धेः दुःखित्व इष्टं स्यात् 267 स्वयंलब्धस्वभावत्वात् 192

INDEX TO VERSES 315 PAGE PAGE स्वयंवेद्यत्वपर्यायः 278 स्वसाक्षिकं ज्ञानमतीव 188 स्वयमेवावभास्यन्ते 239 स्वाकारान्यावभासं च 174 स्वरूपं चात्मनो ज्ञानम् 237 स्वात्मबुद्धिमपेक्ष्यासौ 152 स्वरूपत्वान्न सर्वस्य 180 स्वार्थस्य ह्यप्रहाणेन 269 स्वरूपस्यानिमित्तत्वात् 179 स्वरूपाव्यवधानाभ्याम् 162 हन्त तर्हि न मुख्यार्थः 236 स्वलक्षणावधिर्नाशः 261 हित्वा जात्यादिसम्बन्धान् 213 हूयन्ते तु हवींषीति 157

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Sanskrit Books with Text, English Translation and Notes ATMABODHA of SRI SANKARACHARYA The famous treatise on Advaita- vedanta, consisting of sixty-eight verses in melodious Sanskrit. Pp. 346 Price Rs. 4 UPANISHADS Each of the Upanishads contains also an Introduction and word-for-word rendering and Notes: Isha ... As. 12 Kena ... As. 12 Katha ... Re. 1-8 Prasna ... Re. 1 Mundaka ... Re. 1 Mandukya ... As. 12 Aitareya ... Re. 1 Taittiriya ... Rs. 2 Svetasvatara ... Re. 1-8 SRI RAMAKRISHNA MATH Mylapore, Madras 4

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