उत्तररामचरितम् (महाकवि भवभूति - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

उत्तररामचरितम् (महाकवि भवभूति - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Uttararamacharitam of Bhavabhuti with Hindi Commentary
महाकवि भवभूति / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा
DevanagariSanskritpublished439 पृष्ठ
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| अं० | श्लो० | अं० | श्लो० | |
|---|---|---|---|---|
| यदा किञ्चित् ६ ३५ | व्यर्थं यत्र कपीन्द्रसख्य ३ | |||
| यदि ते मयि मन्येव ४ २८ | शाङ्गुल्यो नाम यूपल २ | |||
| यत्कण्ठाश्लेषबाद् रिमु ५ १६ | शान्तं महापुरुषसङ्गरित ६ | |||
| य द्ब्रह्माणमिय देवी १ २ | शृणुवां दिव्या या ४ | |||
| यद्वा पूतमन्यो निधि ४ १० | शुद्धाश्चोदन्त ६ | |||
| यस्यां ते दिवसास्तथा २ २८ | शैशवात्प्रभृति पोषिता १ | |||
| येनोत्कण्ठद्विसरिमल्य ३ १५ | श्रमाम्बुशिशिरीभव ६ | |||
| योऽयमश्व ४ १७ | स एव ते वल्लभबन्धु २ | |||
| रणकरण ६ १ | सख्यातीर्तङ्गिरदतुरग ७ | |||
| राज्याश्रमनिवासेऽपि ७ १ | सान्ता केनापि कार्येण १ | |||
| लीलोल्लासदशमुख ३ १६ | सतानवाहीन्यपि ४ | |||
| लौकिकानां हि साधूनां १ १० | समय ग वर्तत इरीप १ | |||
| वज्रादपि कठोराणि २ ७ | समाश्वसिहि कल्याणि ७ | |||
| वत्सायाश्च रघूद्वहस्य ५ २३ | सद्यःप्रसृष्टणीयाना ६ | |||
| वपुर्मिथुतसिद्धा ६ २४ | सर्वात्मनो वसिष्ठादीन् १ | |||
| वयमपि न खल्वेवंप्राया ५ ८ | स राजा तस्यांऽय स थ ४ | |||
| वसिष्ठाधिष्ठिता देव्यो १ ३ | सर्वथा व्यवहर्तव्यं १ | |||
| वशिष्ठे वाग्मीन्द्रैर्दशरथ ६ ३९ | स सुरभी श्लाघ्य ४ | |||
| वितरति गुरुः प्राज्ञे वि० २ ४ | सस्वेदरोमञ्चितकम्पि ३ | |||
| विद्याकल्पेन मरुता ६ ६ | सिद्धं होनङ्कानि वीर्यं ७ | |||
| विशां मोहान्धेभ्या तिमिर ६ ३० | सीतादेव्या स्वकररचितं ३ | |||
| विनिर्वाणित एव ५ ८ | सुहृदिव द्रष्टव्य ४ | |||
| विनिषेधुं शक्यो न १ ३० | सैनिकानां प्रमाथेन ४ | |||
| विरोधो विश्रान्तः प्रम० ६ ११ | सोढभिरे राक्षसमुख्य ७ | |||
| विलुलितमतिपूर्व्याष्प ३ २३ | सोऽयं शैलः ककुभ १ | |||
| विश्वम्भरात्मजा देवी ७ ३ | स्निग्धश्यामा क्वचिदपर २ | |||
| विश्वम्भरा भगवती १ १९ | स्नेहं दयां च सौख्यं च १ | |||
| विश्रम्भादुदति निष्वप १ ४९ | स्नेहात्सभाजयितुमेत्य १ | |||
| वीचीवातैः शीकरक्षोद ३ २ | स्पर्श पुरा परिचितो ३ | |||
| वृथादाने न विनार्यात्म० ६ २४ | स्मरति सुतनु १ | |||
| वैलोम्योद्भूभित ३ ३६ | हा हा देवि स्फुटती ३ | |||
| व्यतिकर इव भीम० ५ १२ | हा हा धिक्परगृहवास ४ | |||
| व्यतिषजति पदार्थां ६ १२ | सौर निखासुरेवन ४ | |||
| हे हन्त दक्षिण ० |