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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 181321 ग्रन्थ-परिचय 14/ मिश्रा - वै प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति में त्याग के आदर्शों का विशिष्ट महत्त्व है। ईशावास्योपनिषद् R 14 MIS-V में त्यागपूर्ण भोग का उपदेश देते हुए कहा है कि 'तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः।' इसके साथ-साथ अन्य की सम्पत्ति के लिए लोभ न करने का परामर्श भी दिया है। उपनिषद् के इस सन्देश ने समस्त पुराण, स्मृति और भारतीय साहित्य को प्रभावित किया है। शिक्षा जीवन के सातत्य और विकासोन्मुखता को बनाये रखने का एक- मात्र साधन है। अतः भारतीय शैक्षिक परम्परा का अनुगमन करते हुए त्यागवृत्तिपूर्वक भोग में ही वर्तमान की समस्याओं का समाधान ढूंढा जा सकता है। आज की शिक्षा पद्धति पुस्तक केन्द्रित, पाठ्यक्रम केन्द्रित तथा परीक्षा केन्द्रित दिखाई देती है। जबकि इसे ज्ञानोन्मुख, मूल्योन्मुख तथा आदर्शोन्मुख बनाये जाने की आवश्यकता है जिसमें बच्चे तथा समाज के सर्वविध विकास का स्थान है। वैदिक शिक्षा पद्धति भारतीय शैक्षिक विकास हेतु समुचित पथ-प्रदर्शन करने में समर्थ है। इस ग्रन्थ द्वारा वैदिक वाङ्मय में शिक्षा सम्बन्धी अनेक तत्त्वों का आलोडन करके वर्तमान भारतीय शिक्षा पद्धति में इसके उपयोग की सामग्री प्रस्तुत की गई है। शैक्षिक उद्देश्य, पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि, उच्चारण-शिक्षण तथा वैदिक पाठ संरक्षण, गुरु-शिष्य के पारस्परिक सम्बन्ध आदि के विषय में प्रचुर सामग्री इस ग्रन्थ में उपलब्ध है। यह ग्रन्थ प्राचीन भारतीय शिक्षण परम्परा की जानकारी देकर एवं वर्तमानकालीन शिक्षण व्यवस्था को समृद्ध करने में पर्याप्त सहायक है। CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar