भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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देशभक्ति

दुःख के पतों और अल पर गुजर करनेवाले, दिन को रात में और लम्बी को घनेम पक्षिणम कर लकनेवाले एवम् आदि नाविक की कनका को आदिमम कर दे । ( पृष्ठ ६ )

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