भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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वैराग्यशतक

महापुरुष ज्ञान-दृष्टिसे कामिनी की असलियत को देख रहे हैं। कामी लोग भी स्त्रियों की असलियत को बगौर देखें और इनसे घृणा करें। वास्तवमें, स्त्री में कुछ भी नहीं है। सांस्वर्भ-हीन स्त्री कंकाल है।

(पृ० ५८)

Popular Press, Calcutta.

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