भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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हरामयशोक ६६

ये सुख के दिन कब आयेंगे, जब हम ( इन योगीराज की तरह ) गंगातट पर पद्मासन लगा, योगनिद्रा में मग्न होंगे और सूँह-सूँहें हिरन हमारे शरीर की रगद से अपने खुशली मिटाते होंगे ?

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