भारतकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

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ओ३म् भूमिका वैशेषिकदर्शन कणाद् मुनि का बनाया दर्शन है, जिस का "वैशेषिक" नाम इस अन्वर्थ संज्ञा से पड़ा कि- अधिकृत्य कृते ग्रन्थे ४।३।८७ सूत्रानुसार विशेषों का अधिकार करके जो ग्रन्थ बनाया गया, उसका नाम "वैशेषिक" रक्खा गया । अभेदवादी वा मायावादी अद्वैतियों का मत इस शास्त्र के सर्वथा प्रतिकूल है, क्योंकि भेद के विना गौ और घोड़े में विशेष नहीं हो सकता । यह दर्शन विशेषों का व्याख्यान करता है, लिये अद्वैतवादियों ने इस का खण्डनाऽऽभास किया है । अद्वैतसिद्धि वैशेषिकदर्शनोक्त विशेषवाद वा भेदवाद के विरुद्ध कैसे असभ्य और कटु शब्दों में कथन किया है सो श्रीमधुसूदनसरस्वती की अद्वैतसिद्धि द्वि- तीचे के श्लोक से जाना जायगा- इह कुमतिरतत्त्वे तत्त्ववादी वराकः प्रलपति यदकाण्डे खण्डनाभाससमुच्चैः । प्रतिवचनममुष्मै तस्य को वक्तु विद्वान् नहि रुतमनुरौति ग्रामसिंहस्य सिंहः ॥ १ ॥ अर्थ-जो कि अवसर में अतत्त्व में तत्त्व बताने वाला बेचारा कुमा- (वैशेषिकादि का अनुयायी) उच्च खण्डनाभास को बकता है, यहां कौन विद्वा- उस का उत्तर देवे, क्योंकि कुत्ते के भौंकने पर सिंह उत्तर में नहीं भौंकता- धन्य हैं संसार को मिथ्या बताने वाले मिथ्यामायावादी विद्वान् जो मत की इतने कटु शब्दों में ईर्ष्या करते हैं । वेदान्तदर्शन का भाष्य अ- चारम्भ करने का विचार है, उस में जहां २ वैशेषिक वा अन्य शास्त्रों तिरस्कार अद्वैतवादियों ने किया है, वहां उस का समाधान किया जायगा- इस वैशेषिकदर्शन भाषानुवाद के पढ़ने वाले इस भ्रान्ति में नहीं पड़ेंगे षड्दर्शनों में परस्पर खण्डन है । ईश्वर की कृपा से अब न्याय, वैशेषि- सांख्य, योग-इन ४ दर्शनों का अनुवाद और भाष्य पूर्ण होगया । आ- है कि पाठक इस से भी न्यायादि के समान रुचिपूर्वक लाभ उठावेंगे ॥ तुलसीराम स्वा-