वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshan with Prashastapada Bhashya
महर्षि कणाद / महर्षि प्रशस्तपाद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत सीरीज · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 368, कुल 759 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम् ] भाषानुवादसहितम् ४०३ प्रशस्तपादभाष्यम् काले दिक्पिण्डसंयोगविनाशाद् गुणस्य विनाशः । द्रव्यविनाशादपि कथम् परत्वाधारावयवे कर्मोत्पन्नं यस्मिन्नेव कालेऽवयवान्तराद्विभागं करोति, तस्मिन्नेव कालेऽपेक्षा- भूत द्रव्य इन दोनों के) संयोग के विनाश से परत्वादि गुणों का विनाश होता है । ३. (प्र.) (आधारभूत) द्रव्य के विनाश से (परत्वादि गुणों का) विनाश किस प्रकार (किस स्थिति में) होता है ? (उ.) (जहाँ) परत्वादिगुणों के आधारभूत द्रव्य (के एक अवयव) में उत्पन्न हुई क्रिया जिस समय एक अवयव का दूसरे अवयव से विभाग को उत्पन्न करती है, न्यायकन्दली बुद्धेश्च परत्वस्योत्पत्तिरित्येकः कालः । तत उत्पन्ने परत्वे परत्वसामान्यबुद्धेरुत्पत्तिः दिक्पिण्डसंयोगस्य च विभागाद् विनाश इत्येकः कालः । ततो यस्मिन्नेव काले सामान्यज्ञानाद् गुणबुद्धिरुत्पद्यते तस्मिन्नेव काले दिक्पिण्डसंयोगविनाशात् परत्वस्य विनाशो नापेक्षाबुद्धिविनाशात्, अपेक्षाबुद्धेरपि तदानीमेव विनाशात् । द्रव्यविनाशादपि कथं विनाश इत्याह-परत्वाधारावयव इति । भविष्यतः परत्वस्याधारो द्रव्यम्, तस्यावयवे कर्मोत्पन्नं यदाऽवयवान्तराद् विभागं करोति, तस्मिन्नेव कालेऽपेक्षाबुद्धिरुत्पद्यते ततो विभागाद् यस्मिन्नेव काले द्रव्यारम्भकसंयोगविनाशः, तस्मिन्नेव कालेऽपेक्षाबुद्धेः परत्वमुत्पद्यते । ततः एवं अपेक्षाबुद्धि के द्वारा परत्व की उत्पत्ति होती है । इतने सारे काम एक ही समय होते हैं । इसके बाद जिस समय (परत्वगत जातिरूप) सामान्य के ज्ञान से गुणविशिष्टद्रव्य विषयक बुद्धि की उत्पत्ति होती है, उसी समय दिशा और (परत्व के आधारभूत द्रव्य रूप) पिण्ड इन दोनों के संयोग के विनाश से परत्व का भी विनाश होता है । (यहाँ) परत्व का विनाश अपेक्षाबुद्धि के विनाश से सम्भव नहीं है, क्योंकि उसी समय (परत्वनाश के समय ही) अपेक्षाबुद्धि का भी विनाश होता है । (३) (आधारभूत) द्रव्य के विनाश से परत्वादि का विनाश किस प्रकार होता है ? इस प्रश्न का उत्तर 'परत्वाधारावयवे' इत्यादि ग्रन्थ से दिया गया है । उत्पन्न होनेवाले परत्व के आधारभूत अवयवि द्रव्य ही (प्रकृत में 'परत्वाधार' शब्द से इष्ट है) इस (द्रव्य) के अवयव में उत्पन्न हुई क्रिया जिस समय (अपने आधारभूत एक अवयव द्रव्य का) दूसरे अवयव से विभाग को उत्पन्न करती है, उसी समय अपेक्षाबुद्धि भी उत्पन्न होती है । इसके बाद जिस समय विभाग से द्रव्य के उत्पादक संयोग का विनाश