वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshan with Prashastapada Bhashya
महर्षि कणाद / महर्षि प्रशस्तपाद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत सीरीज · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रशस्तपादाचार्यप्रणीतं प्रशस्तपादभाष्यम् [ पदार्थधर्मसङ्ग्रहाख्यम् ] श्रीधरभट्टकृत- न्यायकन्दलीव्याख्योपेतम् श्रीदुर्गाधरझाकृत-हिन्दीभाषानुवादसहितम् प्रशस्तपादभाष्यम् प्रणम्य हेतुमीश्वरं मुनिं कणादमन्वतः । पदार्थधर्मसङ्ग्रहः प्रवक्ष्यते महोदयः ॥ (सभी जन्यपदार्थों के) कारण ईश्वर को प्रणाम करने के पश्चात् कणाद मुनि को प्रणाम करके 'महोदय' अर्थात् मोक्ष देनेवाले 'पदार्थ- धर्मसङ्ग्रह' नाम के ग्रन्थ को लिख रहा हूँ। न्यायकन्दली अनादिनिधनं देवं जगत्कारणमीश्वरम् । प्रपद्ये सत्यसङ्कल्पं नित्यविज्ञानविग्रहम् ॥ १ ॥ ध्यानैकतानमनसो विगतप्रचाराः पश्यन्ति यं कमपि निर्मलमद्वितीयम् । ज्ञानात्मने विघटिताखिलबन्धनाय तस्मै नमो भगवते पुरुषोत्तमाय ॥ २ ॥ आदि और विनाश से रहित एवं जगत् के निमित्तकारण, तथा जिनके संकल्प कभी विफल नहीं होते, नित्यविज्ञानस्वरूप उन परमेश्वर की शरण को मैं प्राप्त होऊँ ॥ १ ॥ सभी दोषों से रहित एवं सांसारिक सभी वस्तुओं से सर्वथा विलक्षण जिस वस्तु को योगिगण एकाग्र होने पर देखते हैं, सभी बन्धनों से शून्य, ज्ञान-स्वरूप उन भगवान् पुरुषोत्तम को मैं प्रणाम करता हूँ ॥ २ ॥