वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
पृष्ठ 230, कुल 835 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रत्ययविधौ' इति वार्तिकेन पुंवद्भावबोधनादित्यर्थः" Wait, is it 'सिद्धञ्च' or 'सिद्धं च'? 'सिद्धश्च'? It looks like 'सिद्धञ्च'.
१ नवनं नूः स्तुतिः नुवं स्तुतिं कषाते तच्छीलः ताच्छील्ये चानश् वा ॥ Wait! Look at line 32: "१ नवनं नूः स्तुतिः नुवं स्तुतिं कषाते तच्छीलः ताच्छील्ये चानश् वा ॥" Wait, is it "कषाते" or "कुरुते"? Let's zoom in on line 32: "१ नवनं नूः स्तुतिः नुवं स्तुतिं कषाते तच्छीलः ताच्छील्ये चानश् वा ॥" Wait: क-रु-ते? No, look at the letters: क - रु? No, there is: क, then a letter with loop... wait, is it "कुरुते"? Look at 'कु' in "कुक्कुटग्राह" or "कुलात्खः". 'कु' has an under-loop. Here: क, then ष, then त, with e-matra: 'कषते'? Wait, look at the root: 'नू' = स्तुतौ. नवनं नूः स्तुति