भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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धातोरवयवमिच्छन्ति"? Wait, look at line 22: वृताधातोरवयवमिच्छन्ति - wait, is there an extra letter between र and व? Look at: वृताधातोरवयव... - wait, does it say वृताधातोरवयव... or वृताधातोरप्यवयव...? Wait, there is: र, then something, then व, य, व. Wait, look at footnote 6 (line 33-34): "६ पक्षान्तर इति । भाष्यस्वरसस्त्वत्र पक्षे न..." And look at line 23: ॥ पक्षा- न्तरम् । - wait, line 23 ends with: ॥ पक्षा- And line 24 footnote 6 explains: ६ पक्षान्तर इति । Wait, why does line 22 say: वृताधातोरवयवमिच्छन्ति? Wait, is it "वृत् धातोः" or "वृतु धातोः"? In line 23: ॥ ११ ॥ वृतु वरणे । वृत्यते ॥ So before that: वृद्धातोः? No, वृताधातोः? Wait, look at line 22 again: केचित्तु वाग्रहणं वृताधातोरवयवमिच्छन्ति or वृताधातोरप्यवयवमिच्छन्ति