भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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" no: "ह्वः संप्रसारणम्" ६।१।३२: "ह्वः सम्प्रसारणम् । अभ्यस्तस्य । णौ च संश्चङोः") Wait, sutra 6.1.32 is: "ह्वः सम्प्रसारणम्" (6.1.32). Wait, Panini 6.1.32 is: "ह्वः संप्रसारणम्" No, Panini 6.1.32 is: "ह्वः संप्रसारणम्" or what? In 6.1: 6.1.32 is "ह्वः" (with संप्रसारणम् from 6.1.13). Then what are the examples? For सम्-परे: wait, no, "सम्परे" or "सनि परे"? Ah, "सनि परे चङ्परे च णौ"! Look at L13: "॥ सनि परे चङ्परे च णौ ह्वः संप्रसारणं स्यात् ॥" Wait, look at L13: Is it "सनि परे" or "सम्परे"? Let's look at the letters in L13: ॥ स न्पे? or न्परे? No, look: स, then न with a virama or न्परे? Wait, look at the first letter after ॥: स then न्परे?