वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
DevanagariHindipublished835 पृष्ठ
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( ४४ ) धातुसूची ।
| पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ३०३ | शटृ | ३३६ | शिल्टू | ३०४ | शेवृ | ३०९ | श्लथ |
| ३०३ | शङ्क | ३५८ | शीक | ३५८ | शैङ् | २७३ | श्लाघ |
| ३१४ | शण | ३५३ | शीक | ३५० | शै | २७३ | श्लातृ |
| ३३४ | शप | २७२ | शीक | २८९ | शेलृ | ३३५ | श्लिष |
| ३५७ | शब्द | ३२० | शीङ् | २८८ | शेवृ (पा.) | ३३५ | श्लिष |
| ३५६ | शम | २८१ | शीभृ | ३०७ | शौ | २९३ | श्लिपु |
| ३०१ | शम | २८८ | शील | ३३३ | श्चो | २७२ | श्लोकृ |
| ३३६ | शमु | ३६१ | शील | २८५ | श्चोतृ | २८५ | श्लोणू |
| ३५३ | शम्ब | २७५ | शुच | २७९ | श्चोट् | २७२ | श्वकि |
| २८२ | शर्व | ३३४ | (ई)शुचिर् | २७० | श्च्युतिर् | २७४ | श्वच |
| २८९ | शर्व | २८८ | शुच्च | २८८ | श्मील | २७४ | श्वचि |
| २८७ | शल | २८० | शुट | ३१० | श्यैङ् | ३५४ | श्वठ |
| ३०२ | शल | ३५५ | शुट | ३७२ | श्रकि | ३६० | श्वट |
| २८१ | शलभ | २८० | शुठ | २७३ | श्रगि | ३५४ | श्वटि (पा.) |
| २९५ | शव | २८० | शुठ (पा.) | २३९ | श्रण | ३५५ | श्वभ्र |
| २९५ | शश | ३५५ | शुठि | ३५४ | श्रम | ३५४ | श्वर्त |
| २९३ | शष | ३३५ | शुण | २९९ | श्रथ | २७९ | श्वल |
| २९१ | (आङः) शसि | ३४२ | शुन | ३५३ | श्रथ | ३५४ | श्वल्क |
| २९५ | शसु | २७२ | शुन्ध | ३५९ | श्रथ | २८९ | श्वल्ल |
| २९५ | शंसु | ३५९ | शुन्ध | ३६१ | श्रथ | ३२६ | श्वस |
| २७३ | शाकृ | २९५ | शुभ | १६१ | श्रथि | ३१६ | (टुओ) श्वि |
| शाङ्क | २८३ | शुभ | ३६१ | श्रन्थ | २९५ | षिता | |
| ३१४ | शान | ३४२ | शुभ | ३५१ | श्रन्थ | २६८ | ष्विदि |
| ३१९ | (आङः) शासु | २८३ | शुभ्भ | ३६० | श्रन्थ | २९९ | षगे |
| ३२४ | शासु | ३४२ | शुभ्भ | ३३६ | श्रमु | ||
| २९१ | शिक्ष | ३५४ | शुल्क | २८१ | श्रम्भु | २३९ | षध |
| २७३ | शिखि (पा.) | ३५४ | शुल्व | ३०० | श्रा | २७४ | षच |
| २७४ | शिखि | ३३५ | शुप | ३२३ | श्रा | ३१४ | षच |
| ३१९ | शिजि | ३६२ | शूर | ३०५ | श्रिञ् | ३१३ | षञ्ज |
| ३३८ | शिञ् | ३३३ | शूरी | २९३ | श्रिषु | २७१ | षट |
| २७९ | शिट | ३५४ | शूर्प | ३४९ | श्रीञ् | ३५५ | षट्ट |
| ३४३ | शिल | २८८ | शूल | ३०९ | श्रु | २८५ | षण |
| २९३ | शिष | २९३ | शूप | ३०७ | श्रै | ३४७ | षणु |
| ३५९ | शिष | २९६ | शृधु | २८५ | श्रोण | ३५९ | (आङः) षद |
| २७२ | श्लकि | ३०३ | षद्लृ | ||||
| २७३ | श्लगि |