वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
DevanagariHindipublished835 पृष्ठ
पृष्ठ 817, कुल 835 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 817
वार्तिकसूची। (१०९)
| वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|
| ऋचि चेरुत्तरपदा० | ५०५ | कमेश्च्लेश्चङ् वक्तव्यः | २४४ | क्रुकन्नपि वाच्यः | ४४९ |
| ऋति सवर्णे ऋ० | १२ | क.तृकर्मणोरिष्यर्थ० | ४९० | क्रोशशतयोजन० | २१८ |
| ऋतुनक्षत्राणां समा० | १५१ | कर्मणः करणसंज्ञा० | ९८ | क्लृपि संपद्यमाने च | १०० |
| ऋते च तृतीया० | १० | कर्मणि समि च | ४३३ | क्लिन्नस्य चिलिपहल० | २२६ |
| ऋतोर्वृद्धिर्माद्विधा० | १९८ | कर्मप्रवचनीयानां० | २३१ | क्विब्वचिप्रच्छ्यो० | ४४९ |
| ऋदुपधेभ्यो लिटः० | २९२ | कर्मव्यतिहारे० | ४८० | क्षो लुप्ते न स्थानि० | ३८ |
| ऋल्वादिभ्यः |