वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
DevanagariHindipublished835 पृष्ठ
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|---|---|---|
| ४६० तनोतेरनश्च वः | ४६४ दुतनिभ्यां दीर्घश्च | ४७३ नौ दीर्घश्च |
| ४७४ तनोतेर्ड उः सन्वच्च | ४५८ दुरिणो लोपश्च | ४७१ नौ व्यो यलोपः पू० |
| ४६४ तन्वर्तिभ्यां क्सरन् | ४५६ दृणातेः पुग्घ्रस्वश्च | ४६९ नौ वञ्जेर्घिन् |
| ४५६ तमिदिशिविदिमां० | ४७२ दृगातेर्ह्रस्वश्च | ४६१ नौ सदेः |
| ४६९ तमेरुक्तृत्राद्विश्च | ४६६ दृदलिभ्यां भः | ४६३ नौ सदेर्डिच्च |
| ४७५ तरतेर्डिः | ४५१ दृशिनिजनिकरि० | ४६३ नौ हः |
| ४५६ तरल्यादिभ्यश्च | ४७३ देशे ह च | ४५४ पः किच्च |
| ४५९ तल्पिशुल्बिभ्यां च | ४५९ द्यतेः | ४६७ पच एलिमच् |
| ४५३ तवीर्गद्धा | ४६१ द्युतेरिसिन्नादेश्च जः | ४५९ पचिनशोर्णुकन्क्० |
| ४६५ ताडेर्णिलुक्च | ४५९ दुदाक्षिभ्यामिनन् | ४७४ पचिमच्योरिच्चो० |
| ४६२ तिजेर्दीर्घश्च | ४५१ धान्ये नित् | ४७३ पचिवचिभ्यां सुट् च |
| ४५८ तिथपृष्ठगूथयूथ० | ४६२ धापृवस्यज्यतिभ्यो० | ४६० पणेरिज्यादेश्च वः |
| ४६६ तुषारादयश्च | ४७० धाप्योः संप्रसारणं च | ४६७ पतस्थ च |
| ४६३ तृणाख्यायां चित् | ४६२ धेट इच्च | ४५४ पतिकठिकुठि० |
| ४६० तृन्तृचौ शंसिक्षदा० | ४६० धृषेर्धिषू च सं० | ४५६ पतिचण्डिभ्यामालञ् |
| ४६२ तृषिक्षुषिरसि० | ४६३ धेट इच्च | ४५६ पतेरङ्गन्पक्षिशि |
| ४७२ तृंदेः क्नो हलोपश्च | ४५९ ध्मो धम च | ४६४ पतेरश्च लः |
| ४६५ तृभ्रूवहिवासिभासि० | ४६१ नजि च नन्देः | ४६८ पतेरत्रिन् |
| ४५६ त्यजितिनयिजिभ्यो० | ४५७ नजि अहातेः | ४७२ पदिप्रथिभ्यां नित् |
| ४५५ त्रौ डुद् च | ४५५ नजि लम्भेर्नलोपश्च | ४७३ पयसि च |
| ४५१ त्रौ रश्च लः | ४५३ नजि व्यथेः | ४६७ परमे कित् |
| ४६३ त्रौ रश्च लो वा | ४७३ नजि इन एह् च | ४५९ परौ व्रजेः पः पदान्ते |
| ४७४ दधातैर्यन्नुद् च | ४६४ नञ्याप इट् च | ४६४ पर्जन्यः |
| ४७२ दमेरुनसिः | ४६० नप्तृनेष्टृत्वष्टृहोट्ट० | ४७२ पातेर्डुम्सुन् |
| ४६० दमेर्डोसिः | ४६१ नयेतेर्डिच्च | ४७३ पातेरतिः |
| ४५५ दरिद्रातेर्यलोपश्च | ४७२ नहोर्दीवि मश्च | ४६८ पातेर्डितिः |
| ४६८ दल्मिः | ४७४ नहेर्हलोपश्च | ४७२ पातर्बले जुट् च |
| ४७३ दंशेश्च | ४७० नहो भश्च | ४५८ पातुतुदिव्रांदरिचि० |
| ४७३ दंसेष्टटनौ० | ४७१ नामन्सीमन्वो० | ४७० पांद् च |
| ४७५ दहेर्गेा लोपो० | ४५२ नावश्चेः | ४६१ पानीविषिभ्यः पः |
| ४७२ दादिभ्यश्छन्दसि | ४५८ निन्देर्नलोपश्च | ४५६ पारयतेरोजिः |
| ४६३ दाभाभ्यां नुः | ४६८ नियो मिः | ४६७ पिनाकादयश्च |
| ४६४ दिविवाय्यः | ४५८ निशीथगोपीथा० | ४६१ पिवतेस्थुक् |
| ४६१ दिवेर्वः | ४७३ नुवो धुट् च | ४६४ पिशेः किच्च |
| ४६५ दिवः कित् | ४५५ नृतिशृभ्योः क्रूः | ४६८ पीयेरूषन् |
| ४७१ दिवेर्युवच्च | ४६४ पीयुक्षणिभ्यां० | |
| ४६८ दिवो ढ़ेल्डीधिश्च० | ||
| ४६६ दीङो नुट् च | ||
| ४६९ दुंकोकुक्व च |