भारतकोश
वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)

वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)

Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary

भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished192 पृष्ठ

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[ २० ] इस प्रकार वाक्यपदीय के द्वितीय काण्ड में वाक्य और वाक्यार्थ के विषय में जितने भी तर्क उपस्थित हुए हैं अथवा हो सकते हैं सब पर संक्षिप्त विचार किया है । पुण्यराज ने इस काण्ड की टीका के अन्त में कारिकाबद्ध विषयानुक्रमणिका लिखी है जिसे हम यहाँ नहीं दे रहे हैं। तृतीय काण्ड का प्रतिपाद्य विषय वाक्यपदीय का तृतीय काण्ड जो प्रकीर्ण काण्ड भी कहा जाता है उस पर विशेष विवेचन की आवश्यकता नहीं है केवल उसके प्रकरणों का निर्देश कर देने से इस ग्रन्थ को देखने के प्रति रुचि जाग उठेगी और प्रतिपाद्य विषयों पर विचार करने का दृष्टिकोण बनेगा । अतः मैं यहाँ केवल प्रकरणों की सूची मात्र दे रहा हूँ । १. जातिसमुद्देश, २. द्रव्यसमुद्देश, ३. सम्बन्धसमुद्देश, ४. द्रव्यलक्षणसमुद्देश, ५. गुण- समुद्देश, ६. दिक्समुद्देश, ७. साधनसमुद्देश (कारकविचार), ८ क्रियासमुद्देश, ९. कालसमुद्देश, १०. पुरुषसमुद्देश, ११. संख्यासमुद्देश, १२. उपग्रहसमुद्देश, १३. लिंगसमुद्देश, १४. वृत्ति- समुद्देश । यह समुद्देश बड़ा तो है किन्तु वृत्तियों का रमणीय विशद विवेचन इसे महत्त्वशाली बनाए हुए है । इस काण्ड में लक्षणसमुद्देश और बाधासमुद्देश नाम के दो प्रकरण अनुपलब्ध हैं जिनकी चर्चा हमने पहले सप्रमाण की है । विजयदशमी } २०१८ विक्रमी } रामगोविन्द शुक्ल