भारतकोश
वामन पुराण

वामन पुराण

Vamana Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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॥ श्रीहरिः ॥

विषय-सूची

अध्यायविषयपृष्ठ-संख्याअध्यायविषयपृष्ठ-संख्या
१-श्रीनारदजीका पुलस्त्य ऋषिसे वामनाश्रयी प्रश्न, शिवजीका लीलाचरित्र और जीमूतवाहन होना ...द्वीपकी स्थिति और उनमें स्थित पर्वत तथा नदियोंका वर्णन ...................................६६
२-शरदागम होनेपर शंकरजीका मन्दरपर्वतपर जाना और दक्षका यज्ञ .......................................१२१४-दशाङ्ग-धर्म, आश्रम-धर्म और सदाचार-स्वरूपका वर्णन .....................................................७०
३-शंकरजीका ब्रह्महत्यासे छूटनेके लिये तीर्थोंमें भ्रमण; बदरिकाश्रममें नारायणकी स्तुति; वाराणसीमें ब्रह्महत्यासे मुक्ति एवं कपाली नाम पड़ना.........................................................१७१५-दैत्योंका धर्म एवं सदाचारका पालन, सुकेशीके नगरका उत्थान-पतन, वरुणा-असीकी महिमा, लोलार्क-प्रसंग.............................................८१
४-विजयाकी मौसी सतीसे दक्ष-यज्ञकी वार्ता, सतीका प्राण-त्याग; शिवका क्रोध एवं उनके गणोंद्वारा दक्ष-यज्ञका विध्वंस ........................२११६-देवताओंका शयन-तिथियों और उनके अशून्यशयन आदि व्रतों एवं शिव-पूजनका वर्णन...................८५
५-दक्ष-यज्ञका विध्वंस, देवताओंका प्रताड़न, शंकरके कालरूप और रथ्यादि रूपोंमें स्वरूप-कथन ........................................................२५१७-देवाङ्गोंसे तरुओंकी उत्पत्ति, अखण्डव्रत-विधान, विष्णु-पूजा, विष्णुपञ्जरस्तोत्र और महिषका प्रसङ्ग ....................................................९०
६-नर-नारायणकी उत्पत्ति, तपश्चर्या, बदरिकाश्रमकी वसन्तकी शोभा, काम-दाह और कामकी अनङ्गताका वर्णन ..........................३०१८-महिषासुरका अतिचार, देवोंकी तेजोराशिसे भगवती कात्यायनीका प्रादुर्भाव, विन्ध्यप्रसंग, दुर्गाकी अवस्थिति ...................................................९६
७-उर्वशीकी उत्पत्ति-कथा, प्रह्लाद-प्रसंग—नर-नारायणसे संवाद एवं युद्धोपक्रम ..............३८१९-चण्ड-मुण्डद्वारा महिषासुरसे भगवती कात्यायनीके सौन्दर्यका वर्णन, महिषासुरका संदेश और युद्धोपक्रम ................................................१००
८-प्रह्लाद और नारायणका तुमुल युद्ध, भक्तिसे विजय .........................................................४३२०-भगवती कात्यायनीका दैत्योंके साथ युद्ध; महिषासुर-वध एवं देवीका शिवजीके पादमूलमें लीन हो जाना ....................................१०५
९-अन्धकासुरकी विजिगीषा, देवों और असुरोंके वाहनों एवं युद्धका वर्णन ...................................४९२१-देवीके पुनराविर्भाव-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर; कुरुक्षेत्रस्थ पृथूदकतीर्थका प्रसङ्ग; संवरण-तपतीका विवाह ..१०९
१०-अन्धकके साथ देवताओंका युद्ध और अन्धककी विजय ..........................................५३२२-कुरुकी कथा, कुरुक्षेत्रका निर्माण-प्रसङ्ग और पृथूदक तीर्थका माहात्म्य ................................११५
११-सुकेशीकी कथा, मगधारण्यमें ऋषियोंसे प्रश्न करना, ऋषियोंका धर्मोपदेश, देवादिके धर्म, भुवनकोश एवं इक्कीस नरकोंका वर्णन ............५८२३-वामन-चरितका उपक्रम, बलिको दैत्यराज्याधिपति होना और उनकी अतुल राज्य-लक्ष्मीका वर्णन ...१२०
१२-सुकेशीका नरक देनेवाले कर्मोंके सम्बन्धमें प्रश्न, ऋषियोंका उत्तर और नरकोंका वर्णन .............६२२४-वामन-चरितके उपक्रममें देवताओंका कश्यपजीके साथ ब्रह्मलोकमें जाना ..................................१२२
१३-सुकेशीके प्रश्नके उत्तरमें ऋषियोंका जम्बू-२५-वामन-चरितके संदर्भमें ब्रह्माका उपदेश तथा तदनुसार देवोंका श्वेतद्वीपमें तपस्या करना .........१२४