वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसूक्ष्मशरीर निरूपण १९३. (३) यहाँ प्रयुक्त प्रथम 'केचित्' पद सांख्यमतावलम्बी विद्वानों के लिए तथा द्वितीय 'केचित्' वेदान्तमतावलम्बी विद्वानों के लिए प्रयुक्त हुआ है। (४) प्राणमयकोश भी सूक्ष्मशरीर का एक अंग है। अतः यहाँ इसका विस्तृतवर्णन किया गया है। (५) प्रस्तुत प्रकरण को चित्रात्मकरूप में समझने के लिए द्रष्टव्य भूमिका में चित्रसंख्या चार, पाँच एवं छः। अवतरणिका-सूक्ष्मशरीर के कोषत्रय के बाह्यस्वरूप का कथन करके दैनिकव्यवहार में उनकी भूमिका का कथन करते हैं- एतेषु कोशेषु मध्ये विज्ञानमयो ज्ञानशक्तिमान् कर्तृरूपः। मनोमय इच्छाशक्तिमान् करणरूपः। प्राणमयः क्रियाशक्तिमान् कार्यरूपः। योग्यत्वादेवमेतेषां विभाग इति वर्णयन्ति। एतत्कोशत्रयं मिलितं सत्सूक्ष्मशरीरमित्युच्यते॥१३॥ पदच्छेद- एतेषु कोशेषु मध्ये विज्ञानमयः शक्तिमान् कर्तृरूपः। मनोमयः इच्छाशक्तिमान् करणरूपः। प्राणमयः क्रियाशक्तिमान् कार्यरूपः। योग्यत्वात् एवम् एतेषाम् विभागः इति वर्णयन्ति। एतत् कोषत्रयम् मिलितम् सत् सूक्ष्मशरीरम् इति उच्यते॥13॥ अनुवाद-इन (तीन) कोशों के बीच ज्ञानशक्ति से युक्त विज्ञानमयकोश कर्तारूप है। इच्छाशक्ति से युक्त मनोमयकोश करणरूप है। क्रियाशक्ति से युक्त प्राणमयकोश कार्यरूप है। इनकी योग्यता के आधार पर ही (विद्वान् लोग) इसप्रकार इनका विभागरूप में वर्णन करते हैं। ये तीनों कोश मिलकर ही 'सूक्ष्मशरीर' इसप्रकार कहे जाते हैं। 'चन्द्रिका'-यहाँ तक ग्रन्थकार ने सत्रह अवयवों से युक्त सूक्ष्मशरीर, जिसे लिङ्गशरीर भी कहते हैं, का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया। साथ ही बताया कि इसमें विज्ञानमय, मनोमय एवं प्राणमय कुल तीन कोश होते हैं। ये तीनों कोश ही वस्तुतः कर्ता, करण एवं क्रियारूप हैं, इस बात का प्रस्तुत गद्यखण्ड में प्रतिपादन करते हैं- विज्ञानमय, मनोमय तथा प्राणमय इन तीनों कोशों के अन्तर्गत प्रथम विज्ञानमयकोश, जिसका निर्माण पञ्चज्ञानेन्द्रिय तथा बुद्धि इन छः तत्त्वों द्वारा होता है, ज्ञानशक्ति से सम्पन्न होने के कारण दैनिक कार्यव्यवहार का कर्ता कहलाता है, क्योंकि ज्ञानेन्द्रियों के माध्यम से विषयों को ग्रहण करके मन