भारतकोश
वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished314 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 314 में से

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१० वेदान्तसार लगभग 20 उपनिषद् सर्वाधिक प्राचीन माने गए हैं। शेष बहुत बाद की रचनाएँ हैं। ब्राह्मणग्रन्थों के अन्त में जुड़े हुए उपनिषद् सर्वाधिक प्राचीन कहे जा सकते हैं। जिनकी संख्या लगभग छः है- (1) ऐतरेय उपनिषद् (ऐतरेय ब्राह्मण, ऋग्वेद सम्बन्धी) (2) कौषीतकि उपनिषद् (कौषीतकि ब्राह्मण, ऋग्वेद सम्बन्धी) (3) तैत्तिरीय उपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय आरण्यक विषयक) (4) बृहदारण्यकोपनिषद् (शुक्ल यजुर्वेदीय शतपथ ब्राह्मण विषयक) (5) छान्दोग्योपनिषद् (सामवेद की ताण्ड्यशाखा से सम्बन्धित छान्दोग्य ब्राह्मण में) (6) केनोपनिषद् (सामवेद की तलवकार शाखा से जुड़े जैमिनीय ब्राह्मण में) यद्यपि ये सभी छः उपनिषद् भारतीयदर्शन के विकास की प्रारम्भिक अवस्था को प्रदर्शित करते हैं तथापि इन सभी में वेदान्तदर्शन अपने शुद्ध एवं मूलरूप में सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे उपनिषद् भी हैं जो वेदान्तदर्शन का विवेचन तो करते हैं, किन्तु उतने परिशुद्ध रूप में नहीं, वहाँ उनमें सांख्य एवं योगदर्शन के तत्त्वों के भी दर्शन होते हैं। इनकी संख्या लगभग आठ है- (1) कठोपनिषद् (काठक संहिता, कृष्णयजुर्वेद विषयक) (2) श्वेताश्वतरोपनिषद् (तैत्तिरीय संहिता, कृष्णयजुर्वेद विषयक) (3) महानारायणोपनिषद् (तैत्तिरीय संहिता, कृष्णयजुर्वेद विषयक) (4) ईशोपनिषद् (वाजसनेयी संहिता, शुक्लयजुर्वेद विषयक) (5) मुण्डकोपनिषद् (अथर्ववेद सम्बन्धी) (6) प्रश्नोपनिषद् (अथर्ववेद सम्बन्धी) (7) मैत्रायणी उपनिषद् (कृष्ण-यजुर्वेद विषयक) अपेक्षाकृत अर्वाचीन। (8) माण्डूक्योपनिषद् (अथर्ववेद सम्बन्धी) अपेक्षाकृत अर्वाचीन। इसप्रकार उपर्युक्त 14 उपनिषद् वेदान्तदर्शन की आधारशिला माने गए हैं। इसीलिए वेदान्तदर्शन के भाष्यकारों एवं टीकाकारों ने इन्हीं के वाक्यों को पदे-पदे उद्धृत किया है। उपनिषदों का यही साहित्य 'वेदान्त' भी कहा जाता है, जो सूक्ष्मदृष्टि से उपयुक्त भी प्रतीत होता है क्योंकि वेदान्तदर्शन